के. अन्नामलाई ने केंद्र और दिल्ली पुलिस पर उठाए सवाल, बोले- विरोध का अधिकार लोकतंत्र का हिस्सा

चेन्नई, 21 अक्टूबर . भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और नेता के. अन्नामलाई ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए केंद्र Government, दिल्ली Police और हालिया विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी समूह को अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन असहमति को राष्ट्रविरोधी करार देना उचित नहीं है.

अन्नामलाई ने अपनी पोस्ट में 2011 की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन Gujarat के Chief Minister Narendra Modi ने रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन पर Police कार्रवाई के बाद केंद्र Government की आलोचना की थी. अन्नामलाई ने कहा कि उस समय मोदी का रुख सही था और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के पक्ष में था.

उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय में विरोध प्रदर्शन करने वालों को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है, उनके जमानती बांड खारिज किए जा सकते हैं, और प्रक्रिया संबंधी सवाल उठाने पर उन्हें विभिन्न तरह के आरोपों का सामना करना पड़ सकता है.

अन्नामलाई ने कहा कि उन्होंने पहले भी नीट परीक्षा से जुड़े प्रदर्शनों के दौरान केंद्र Government से प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की अपील की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर बयान देने के बाद से उन्हें लगातार Political हमलों का सामना करना पड़ा.

पूर्व भाजपा नेता ने कहा कि हाल ही में उन्होंने दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के तरीके पर सवाल उठाए थे. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह संगठन की सभी रणनीतियों से सहमत नहीं हैं, लेकिन किसी भी समूह को अपने मुद्दों पर विरोध, बहस और प्रदर्शन करने का लोकतांत्रिक अधिकार है.

उन्होंने केंद्र Government से कई सवाल पूछते हुए जानना चाहा कि जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचना से बाहर करने का निर्णय कैसे लिया गया, विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियों की समीक्षा क्यों नहीं की जाती, और कुछ मामलों में जमानत प्रक्रिया को लेकर विवाद क्यों उत्पन्न हुए.

अन्नामलाई ने यह भी कहा कि किसी भी विरोध या Government की आलोचना को स्वतः ‘राष्ट्रविरोधी’ करार देना उचित नहीं है. उन्होंने दावा किया कि देश की एजेंसियां और सरकारी संस्थाएं पर्याप्त रूप से सक्षम हैं और हर असहमति को विदेशी ताकतों से प्रेरित बताना लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है.

उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा सीजेपी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस तरह की गतिविधियों से विरोधी समूहों को अनावश्यक प्रचार मिल सकता है.

अपनी पोस्ट के अंत में अन्नामलाई ने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं का सम्मान जरूरी है, लेकिन साथ ही नागरिकों को Government से सवाल पूछने और जवाब मांगने का अधिकार भी होना चाहिए. उन्होंने केंद्र Government से आलोचनाओं का जवाब तथ्यों के आधार पर देने और Political असहमति को राष्ट्रविरोध से जोड़ने से बचने की अपील की.

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एएमटी/डीकेपी