केरल: सतीशन कैबिनेट गवर्नेंस पर दो दिन के क्रैश कोर्स के लिए ‘आईआईएम-के’ जाएगी

कोझिकोड, 3 सितंबर . वीडी सतीशन Government की नई पीढ़ी वाली छवि को ध्यान में रखते हुए पूरी कैबिनेट सत्ता के गलियारों से हटकर Friday को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट-कोझिकोड (आईआईएम-के) के क्लासरूम में जाएगी. यहां मंत्रियों और सीनियर अधिकारियों को गवर्नेंस के बारे में व्यापक नजरिए से अवगत कराने के लिए दो दिन का मंथन सत्र आयोजित किया जाएगा.

इस क्लासरूम प्रोग्राम में Chief Minister , उनकी कैबिनेट और सीनियर अधिकारी आईआईएम-के के सीनियर फैकल्टी सदस्यों के साथ कई इंटरैक्टिव सत्रों, रोल-प्ले और चर्चाओं में हिस्सा लेंगे. इन सत्रों में गवर्नेंस से जुड़ी आज की चुनौतियों पर बातचीत होगी.

दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब केरल कैबिनेट ने आईआईएम-के में क्लासरूम वाला तरीका अपनाया है.

2011 में, तत्कालीन Chief Minister ओमन चांडी और उनकी कैबिनेट ने गवर्नेंस और प्रशासन पर मंथन करने के लिए संस्थान में दो दिन बिताए थे.

आईआईएम-के के डायरेक्टर देबाशीष चटर्जी इस बार भी प्रोग्राम का नेतृत्व करेंगे.

चटर्जी ने कहा कि खास बात यह है कि यह Chief Minister नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने कहा कि संस्थान सतीशन और उनकी टीम को अपने फैकल्टी की समझ और अनुभव का लाभ देगा.

इन सेशन में कई विषयों पर चर्चा होगी, जैसे कि क्लाइमेट चेंज और नई चुनौतियों को मौकों में बदलने के तरीके.

इस प्रोग्राम को पारंपरिक क्लासरूम की तरह नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा इंटरैक्टिव बनाया गया है. इसमें मंत्रियों और अधिकारियों के चर्चा, रोल-प्ले और अनुभव से सीखने वाली दूसरी एक्टिविटीज में शामिल होने की उम्मीद है.

2011 में ओमन चांडी के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए चटर्जी ने कहा कि उस समय के Chief Minister को बताया गया था कि भविष्य के चुनाव जीतने के लिए नई पीढ़ी का भरोसा जीतना जरूरी होगा.

उन्होंने कहा कि हमने ओमन चांडी से कहा था कि जब तक आप नई पीढ़ी का भरोसा नहीं जीतते, तब तक आप अगले चुनाव नहीं जीत सकते. और ऐसा ही हुआ.

मौजूदा कैबिनेट अभी काम संभाल रही है और काफी दबाव के दौर से गुजर रही है. आईआईएम-के प्रोग्राम का मकसद मंत्रियों को गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों को व्यापक नजरिए से देखने में मदद करना है.

चटर्जी ने इसे Government के सामने आने वाले मुद्दों को ‘बालकनी व्यू’ (ऊपर से या दूर से व्यापक नजरिया) से देखने जैसा बताया, न कि प्रशासन की रोजमर्रा की जरूरतों में उलझे रहने जैसा.

हालांकि, दो दिन के इस प्रोग्राम को सिर्फ एक बार होने वाली एक्टिविटी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है.

चटर्जी के मुताबिक, यह आगे की लंबी बातचीत और जुड़ाव की शुरुआत करेगा, और उम्मीद है कि चर्चाओं और सीखने की प्रक्रिया को बाद में भी आगे बढ़ाया जाएगा.

सतीशन कैबिनेट के लिए यह काम सिर्फ जगह बदलने से कहीं ज्यादा है.

एमएस/