
तिरुवनंतपुरम, 4 नवंबर . केरल Government श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को लागू करने के लिए प्रस्तावित राज्य नियमों के तहत श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और बोनस सहित अन्य लाभों का दायरा विस्तृत करने पर विचार कर रही है. इसके लिए तैयार प्रमुख सिफारिशों वाली मसौदा रिपोर्ट Wednesday को श्रम मंत्री बिंदु कृष्णा ने Chief Minister वी.डी. सतीशन को सौंपी.
ये प्रस्ताव ट्रेड यूनियनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद तैयार किए गए हैं. रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशों में न्यूनतम मजदूरी की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली पारिवारिक इकाई में बदलाव शामिल है. वर्तमान में इसके लिए तीन सदस्यों की पारिवारिक इकाई को आधार माना जाता है. समिति ने इसे बढ़ाकर पांच सदस्य करने का प्रस्ताव दिया है. इसमें श्रमिक के माता-पिता को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है. इससे न्यूनतम मजदूरी की गणना का आधार बढ़ेगा और श्रमिकों को अधिक वेतन देने का रास्ता खुल सकेगा.
रिपोर्ट में अधिक से अधिक श्रमिकों को बोनस और अन्य कल्याणकारी लाभों के दायरे में लाने का भी सुझाव दिया गया है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यबल के बड़े हिस्से को श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले लाभ प्राप्त हो सकें.
श्रमिकों की सुरक्षा को भी सिफारिशों में प्राथमिकता दी गई है. समिति ने खतरनाक और जोखिमपूर्ण कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए मुफ्त चिकित्सा जांच की व्यवस्था करने का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा, रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान लागू करने की सिफारिश की गई है. प्रस्तावित राज्य नियमों में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल किए जाएंगे, ताकि महिलाओं को रात के समय काम करने की अनुमति देते हुए उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके.
इन सिफारिशों को तैयार करने के लिए 22 अक्टूबर को Chief Minister की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक विशेष समिति गठित करने का फैसला लिया गया था. बैठक में श्रम संहिताओं के तहत राज्य के नियम तैयार करने के लिए व्यावहारिक सुझाव जुटाने और इस प्रक्रिया में ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने पर सहमति बनी थी. श्रम आयुक्त को समिति का संयोजक बनाया गया था. इसमें विधि विभाग के अतिरिक्त सचिव, विभिन्न ट्रेड यूनियनों के सात प्रतिनिधियों और श्रम विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया था. समिति ने 10 दिनों तक विस्तृत चर्चा और विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा के बाद अपनी रिपोर्ट पूरी की.
समिति ने श्रम संहिताओं को लेकर राज्य Government और ट्रेड यूनियनों की ओर से उठाई गई चिंताओं पर भी विचार किया. इससे पहले प्रस्तावित राज्य स्तरीय संशोधनों की समीक्षा न्यायमूर्ति गोपाल गौड़ा समिति ने की थी. इस समिति ने आवश्यक कानूनी बदलावों को लेकर अपनी सिफारिशें सौंपी थीं. ताजा रिपोर्ट में तालाबंदी (लॉकआउट) और छंटनी (लेऑफ) से जुड़े प्रावधानों में संशोधन का भी सुझाव दिया गया है. इन बदलावों का उद्देश्य ऐसे मामलों में राज्य Government को हस्तक्षेप करने के अधिक अधिकार देना है.
अब राज्य Government इन सिफारिशों की समीक्षा करेगी और इसके बाद श्रम संहिताओं के तहत राज्य के नियम तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया में श्रमिकों को पहले से मिल रहे सुरक्षा उपायों और अधिकारों में किसी तरह की कमी नहीं आनी चाहिए. साथ ही उनकी मजदूरी, कल्याण और कार्यस्थल पर सुरक्षा को पर्याप्त संरक्षण मिलना चाहिए.
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डीएससी
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