
पलक्कड़, 10 अक्टूबर . एशियन गेम्स में दो बार सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय लॉन्ग जम्पर मुरली श्रीशंकर ने केरल में खिलाड़ियों को मिलने वाले आर्थिक प्रोत्साहन, सुविधाओं और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि दूसरे दक्षिण भारतीय राज्यों ने खेलों में काफी सुधार किया है, जबकि केरल अभी भी 10 साल पहले जैसी स्थिति में है. श्रीशंकर का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वह तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं.
मुरली श्रीशंकर ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में चोट लगने के बावजूद रजत पदक जीता. इससे पहले श्रीशंकर ने एशियन गेम्स 2022 में भी सिल्वर मेडल जीता था. लगातार दूसरे एशियन गेम्स पदक पर खुशी जताते हुए श्रीशंकर ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा, “एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर मुझे खुशी हुई. बस एक दुखद बात यह थी कि चौथे प्रयास में मैं चोटिल हो गया, इसलिए मैं प्रतियोगिता को उस तरह पूरा नहीं कर पाया, जैसा चाहता था, लेकिन फिर भी सिल्वर मेडल जीतकर खुश हूं. मुकाबला बहुत कड़ा था. यह एशियन गेम्स में मेरा दूसरा सिल्वर मेडल है, इसलिए मैं सच में बहुत खुश हूं.”
भारतीय लॉन्ग जम्पर को सितंबर 2026 में आयोजित नागोया एशियन गेम्स के दौरान पुरुषों की लंबी कूद प्रतियोगिता के दौरान टखने में चोट लग गई थी. वह चाहते हैं कि इसके लिए उनकी सर्जरी लंदन के फोर्टिस अस्पताल में हो.
श्रीशंकर ने कहा, “इलाज का खर्च स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) और टॉप्स उठाएंगे, इसलिए हमारी एएफआई ने सिफारिश की है कि सर्जरी लंदन के फोर्टिस अस्पताल में होनी चाहिए. यह एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके लिए विशेषज्ञता की जरूरत है, इसलिए हम सर्जरी करवाने के लिए लंदन जा रहे हैं.”
केरल के एथलीट्स के प्रति रवैये पर, भारतीय लॉन्ग जंपर ने कहा, “जब बात आर्थिक मदद, प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे की आती है, तो हम काफी पीछे हैं. करीब 10 साल पहले, लगभग सभी दक्षिण भारतीय राज्यों में एक जैसी सुविधाएं थीं, लेकिन अब उन्होंने अपने खेल में सुधार किया है और आप इन राज्यों से निकलने वाले एथलीट्स के नतीजों और उनकी गुणवत्ता में इसे साफ देख सकते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से केरल में हम अभी भी वहीं हैं, जहां 10 साल पहले थे. भले ही हमारे यहां पिछले संस्करण की तुलना में प्रोत्साहन दोगुना हो गया है, लेकिन दूसरे राज्य हमसे बहुत आगे निकल गए हैं. शायद उन्होंने 8 या 10 गुणा इजाफा किया है. यह ऐसी बात है, जिस पर हमें सच में विचार करना होगा क्योंकि हमारे गले में जो मेडल है, उसका रंग तो एक ही है, लेकिन जो प्रोत्साहन राशि हमें मिल रही है, उसमें एक या दो जीरो का अंतर है. यह बहुत बड़ा अंतर है. मुझे सच में उम्मीद है कि हमारी राज्य Government इस मामले को गंभीरता से लेगी और एथलीटों के लिए कुछ करेगी.”
उन्होंने बताया, “ऐसा नहीं है कि किसी ने सच में कोई ऑफर दिया है, लेकिन अपनी जन्म-स्थान की वजह से मैं तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करने के लिए योग्य हूं. मैं एनओसी ले सकता हूं और हमारा फेडरेशन भी काफी सहयोगी है. तमिलनाडु एथलेटिक एसोसिएशन ने भी मुझे वहां स्वागत करने की इच्छा जताई है. मेरे पास वहां एक विकल्प है, लेकिन अगर राज्य में हालात नहीं सुधरे, तो मुझे उस विकल्प पर विचार करना पड़ सकता है.”
श्रीशंकर ने कहा, “एथलीट्स को भुगतान करने के मामले में हमें अपना तरीका बेहतर करना होगा, क्योंकि हर चार साल में होने वाले इवेंट्स में मिलने वाला फाइनेंशियल इंसेंटिव ही एक तरीका है… क्योंकि इसी तरह India में ओलंपिक स्पोर्ट्स चलते हैं. क्रिकेटरों के उलट, हमें बहुत ज्यादा पैसे नहीं मिलते. तो कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स, ओलंपिक या बड़ी चैंपियनशिप के बाद मिलने वाले फाइनेंशियल इंसेंटिव ही एक प्रोफेशनल एथलीट के तौर पर हमारी कमाई का जरिया होते हैं, इसलिए हमें इस मामले में बेहतर करना होगा. केरल और दूसरे राज्यों के भुगतान में बहुत बड़ा अंतर है. शायद मणिपुर ही एकमात्र ऐसा राज्य है जो केरल से कम भुगतान करता है. इसके पीछे एक वजह भी है, लेकिन एक राज्य के तौर पर अगर हम हेल्थ सेक्टर, शिक्षा और हर चीज में नंबर वन होने का दावा करते हैं, तो हमें एथलीट्स को भुगतान करने के मामले में भी बेहतर करना होगा, वर्ना बहुत सारे एथलीट दूसरी जगह जा सकते हैं या फिर हो सकता है कि हमारे पास अच्छे एथलीट्स का टैलेंट पूल न आए.”
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आरएसजी/डीकेपी
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