केरल: चुनावी हार पर सीपीआई(एम) की प्रारूप रिपोर्ट का विरोध, 300 सदस्यीय बैठक से पहले उठे सवाल

तिरुवनंतपुरम, 7 सितंबर . केरल में सीपीआई(एम) की चुनावी हार पर राज्य सचिवालय द्वारा तैयार की गई प्रारूप रिपोर्ट को Monday को राज्य समिति की बैठक में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा. कई प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि क्या यह रिपोर्ट संगठनात्मक और Political विफलताओं को ईमानदारी से सामने रखती है, जिनकी वजह से पार्टी को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा.

खासतौर पर कन्नूर जिले के प्रतिनिधियों ने रिपोर्ट पर गंभीर आपत्तियां जताईं. इससे पार्टी नेतृत्व पर रिपोर्ट को और अधिक व्यापक और स्पष्ट बनाने का दबाव बढ़ गया है.

प्रतिनिधियों ने कहा कि रिपोर्ट में संगठनात्मक कमियों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है और न ही यह स्वीकार किया गया है कि उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में गलतियां हुई थीं.

उन्होंने यह भी पूछा कि सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति द्वारा की गई समीक्षा और निष्कर्षों का उल्लेख प्रारूप रिपोर्ट में कहां है.

आलोचकों का कहना था कि रिपोर्ट केवल सामान्य तौर पर कमियों का जिक्र करती है, लेकिन यह नहीं बताती कि आखिर कौन सी विशिष्ट गलतियां पार्टी की हार का कारण बनीं.

प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब रिपोर्ट में यह साफ नहीं बताया गया है कि पार्टी से कहां चूक हुई तो सुधारात्मक कदम कैसे तय किए जाएंगे.

रिपोर्ट की इस आधार पर भी आलोचना की गई कि इसे एक सामान्य संगठनात्मक गतिविधियों की रिपोर्ट की तरह तैयार किया गया है, जबकि इसे चुनावी हार का विस्तृत Political विश्लेषण होना चाहिए था.

प्रतिनिधियों का मानना था कि यदि पार्टी को प्रभावी सुधार करने हैं तो उसे अपनी विफलताओं का खुलकर और ईमानदारी से मूल्यांकन करना होगा. Monday को करीब 20 प्रतिनिधियों ने इस विषय पर चर्चा में हिस्सा लिया.

यह बहस इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब यह मामला एक बड़े मंच पर जाएगा.

जल्द ही होने वाली विस्तारित राज्य समिति की बैठक में करीब 300 पार्टी नेता शामिल होंगे. इस बैठक में रिपोर्ट और चुनावी हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी.

राज्य समिति की बैठक में उठी आपत्तियों से संकेत मिलता है कि रिपोर्ट को लेकर बड़े स्तर की बैठक में भी व्यापक बहस हो सकती है.

फिलहाल पार्टी नेतृत्व के सामने ऐसी रिपोर्ट तैयार करने की चुनौती है, जो कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने के साथ-साथ भविष्य के लिए सुधारात्मक कदमों का आधार भी बन सके.

कन्नूर प्रतिनिधियों का हस्तक्षेप इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने रिपोर्ट में केवल छोटे बदलावों की मांग नहीं की, बल्कि उसकी मूल समीक्षा और निष्कर्षों पर ही सवाल खड़े किए हैं.

राज्य समिति की चर्चा Tuesday को भी जारी रहेगी. इसके बाद रिपोर्ट को विस्तारित समिति के सामने रखा जाएगा.

माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में इन चर्चाओं और पार्टी के भीतर उठ रही मांगों का असर दिखाई देगा तथा संगठनात्मक और Political कमियों का अधिक स्पष्ट विवरण शामिल किया जा सकता है.

एएमटी/डीकेपी