
कन्नूर, 27 अक्टूबर . केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज पर केएसयू कार्यकर्ताओं द्वारा हमले की जांच में नया मोड़ आया है. उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को बताया है कि उनके शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं थे.
जांच से सामने आई जानकारी के अनुसार, कन्नूर जिले के परियारम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें गर्दन में सूजन के कारण आईसीयू में भर्ती किया गया था.
एसआईटी ने डॉक्टरों के बयान दर्ज किए हैं और अस्पताल से उनका मेडिकल रिकॉर्ड भी लिया है. ये नए खुलासे वीना जॉर्ज के पूर्व गनमैन अभिलाष द्वारा एसआईटी को यह बताए जाने के कुछ दिन बाद आए हैं कि उन्होंने केरल छात्र संघ (केएसयू) कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपना शुरुआती बयान उनके निर्देश पर दिया था.
अभिलाष ने पहले आरोप लगाया था कि कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन मंत्री पर हथियारों से हमला किया था. उनकी शिकायत के आधार पर Police ने हत्या के प्रयास के आरोप सहित पांच केएसयू कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था.
पांचों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था और जमानत मिलने से पहले उन्होंने 16 दिन न्यायिक हिरासत में बिताए. अभिलाष ने अब जांचकर्ताओं को बताया है कि उन्होंने हथियार से हमले की घटना को देखा ही नहीं था.
उनके इस नए बयान ने मूल शिकायत और कार्यकर्ताओं पर लगाए गए गंभीर आरोपों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक अन्य महिला इंस्पेक्टर ने भी अब एसआईटी को बताया है कि उन्होंने तब जांचकर्ताओं को कोई बयान नहीं दिया था, लेकिन उन्हें अपने नाम से जारी एक बयान देखकर हैरानी हुई.
एसआईटी अब Police महानिदेशक (डीजीपी) को एक रिपोर्ट सौंपने की तैयारी कर रही है, जिसमें कथित तौर पर झूठा बयान देने के लिए अभिलाष के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है.
यह घटना 25 फरवरी को हुई थी, जब केएसयू कार्यकर्ताओं ने कन्नूर रेलवे स्टेशन पर वीना जॉर्ज के खिलाफ काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया था. वह पिछली सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाली Government में स्वास्थ्य मंत्री थीं.
मूल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शनकारियों ने उन पर हथियारों से हमला किया था. हालांकि, जांच ने उस दावे पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं.
रेलवे स्टेशन पर मौजूद Policeकर्मियों के बयान और उपलब्ध cctv फुटेज ने भी हथियार से हमले के आरोप पर सवाल उठाए हैं.
यह मामला केरल में एक बड़ा Political विवाद बन गया है. शुरुआती शिकायत के बाद पांच कार्यकर्ताओं को गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ा था.
कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ Government के सत्ता में आने और मामले में आगे जांच का आदेश देने के बाद एसआईटी का गठन किया गया था.
–
एएस
Skip to content