
Bengaluru, 8 सितंबर . कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के सस्पेंड चेयरमैन साहूकार शिवशंकरप्पा को केपीएससी भर्ती घोटाले के सिलसिले में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) ने तीसरा नोटिस जारी किया है. उन पर बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद पूछताछ के लिए पेश न होने के कारण गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है.
शिवशंकरप्पा ने इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया है. यह घटनाक्रम Tuesday को कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद हुआ है, जिससे भर्ती में अनियमितताओं के मामले में उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है.
जांच के तहत सीआईडी अधिकारी Monday शाम से ही Bengaluru के डॉलर्स कॉलोनी स्थित उनके घर पर तलाशी ले रहे हैं. इस बीच, शिवशंकरप्पा पर यादगीर जिले में 27 एकड़ जमीन से जुड़ा एक और आरोप लगा है. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने दामाद शंकरगौड़ा के जरिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके यह जमीन हासिल की.
जिस जमीन की बात हो रही है, वह यादगीर जिले के शाहपुर तालुक के अनाबी गांव के सर्वे नंबर 242 और 245 में स्थित है.
आरोप है कि जमीन की असली मालकिन बसम्मा के बेटे के तौर पर शंकरगौड़ा को दिखाते हुए जाली दस्तावेज तैयार किए गए. इसके बाद एक गिफ्ट डीड के जरिए 27 एकड़ जमीन शंकरगौड़ा के नाम रजिस्टर कराई गई. बाद में कथित तौर पर वह जमीन शिवशंकरप्पा के नाम पर ट्रांसफर कर दी गई.
बसम्मा के परिवार वालों का आरोप है कि शिवशंकरप्पा ने अपने रसूख का गलत इस्तेमाल करके ऐसे दस्तावेज बनवाए, जिनमें शंकरगौड़ा को बसम्मा का बेटा बताया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में गैर-कानूनी तरीके से वह जमीन शिवशंकरप्पा के नाम ट्रांसफर कर दी गई.
केपीएससी भर्ती घोटाले की सीआईडी जांच के बीच जमीन से जुड़े आरोप सामने आए हैं. इस मामले में शिवशंकरप्पा पहले से ही गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं. सीआईडी भर्ती में हुई गड़बड़ियों की जांच जारी रखे हुए है और मामले में कई लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है.
इस मामले को लेकर काफी Political विवाद है. कर्नाटक Government ने भाजपा से सवाल किया है कि उसके कार्यकाल के दौरान शिवशंकरप्पा को केपीएससी का चेयरमैन क्यों नियुक्त किया गया था? वहीं, भाजपा का दावा है कि राज्य Government में एक अन्य इस्तीफा होगा.
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एसएचके/एबीएम
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