
Bengaluru, 30 सितंबर . Enforcement Directorate (ईडी) Bengaluru जोनल ऑफिस की ओर से कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (केपीएससी) द्वारा 400 पदों के लिए आयोजित वेटेरिनरी ऑफिसर्स रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन में हुई गड़बड़ियों की जांच की जा रही है. यह जांच Bengaluru के विधान सौधा Police स्टेशन में दर्ज कई First Information Report के आधार पर की जा रही है, जो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धाराओं 318(3), 318(4), 336(2), 336(3) और 340(2) के तहत दंडनीय अपराधों से संबंधित हैं.
ईडी की जांच के दौरान ऐसे सबूत मिले, जिनसे पता चला कि बसवराज कन्नाले ने अपने साथियों के साथ मिलकर, वेटेरिनरी ऑफिसर्स रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन में उम्मीदवारों के अवैध चयन में मदद की. उन्होंने अवैध रूप से पैसे लेकर उम्मीदवारों को लीक हुआ प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराया, जिसमें सही उत्तर भी शामिल थे.
जांच से पता चला कि बसवराज कन्नाले ने केपीएससी के तत्कालीन कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन्स, आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के साथ अपनी करीबी जान-पहचान के जरिए लीक हुए प्रश्न-पत्र तक पहुंच हासिल की थी. गंगवार को ही गोपनीय परीक्षा सामग्री की कस्टडी और देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इसके बाद बसवराज कन्नाले ने कई उम्मीदवारों की पहचान की, उनसे संपर्क किया और उन्हें वेटेरिनरी ऑफिसर्स रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन में चयन का भरोसा दिलाया.
जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों और पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत दर्ज विश्वास करने के कारणों के आधार पर बसवराज कन्नाले को 17 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया. उन पर उक्त आपराधिक गतिविधि से प्राप्त अपराध की कमाई को बनाने, इकट्ठा करने और संभालने में शामिल होने का आरोप था. इसके बाद उन्हें 29 सितंबर 2026 को पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया और अदालत ने जांच के लिए बसवराज कन्नाले की 14 दिन की कस्टडी डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट को सौंप दी.
जांच के दौरान यह भी पता चला कि शुरू में हर उम्मीदवार से लगभग 80 लाख रुपए की मांग की गई थी, जिस पर बाद में बातचीत हुई और हर उम्मीदवार से 30 लाख से 40 लाख रुपए लिए गए. तय रकम का कुछ हिस्सा कैश और बैंकिंग चैनलों के जरिए एडवांस के तौर पर लिया गया. बाकी रकम पक्की करने के लिए कुछ उम्मीदवारों से बिना रकम भरे साइन किए हुए चेक और प्रॉमिसरी नोट लिए गए. इनमें से कुछ को बाद में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के दौरान बरामद और जब्त किया गया. जांच में यह भी पता चला कि ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी संघ नियमित, बीदर के बैंक अकाउंट का इस्तेमाल ऊपर बताई गई गैर-कानूनी रिश्वत से जुड़ी कुछ रकम लेने के लिए किया गया था.
जांच में यह भी पता चला कि चुने हुए उम्मीदवारों को Bengaluru के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाया गया, जहां उन्हें सही जवाबों वाला लीक हुआ प्रश्न-पत्र दिया गया. उम्मीदवारों को बसवराज कन्नाले और उनके साथियों की देखरेख में जवाब याद कराए गए. अगले दिन, यानी परीक्षा की तारीख को, उम्मीदवारों को बसवराज कन्नाले और/या उनके साथियों द्वारा इंतजाम की गई गाड़ियों से उनके परीक्षा केंद्रों तक ले जाया गया.
आगे की जांच में केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की भूमिका का पता चला. उन्हें भर्ती परीक्षाओं के पारदर्शी और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और वे अन्य बातों के अलावा प्रश्न-पत्रों की छपाई को अंतिम रूप देने और उसकी निगरानी करने तथा गोपनीय परीक्षा सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार थे.
जांच से पता चला कि ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने अपने पद का दुरुपयोग किया और गैर-कानूनी रिश्वत के बदले, तय परीक्षा से एक दिन पहले बसवराज कन्नाले को सही जवाबों वाला वेटनरी ऑफिसर्स भर्ती परीक्षा का प्रश्न-पत्र लीक करने में मदद की.
इकट्ठा की गई सामग्री के आधार पर केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को तय आपराधिक गतिविधि से अपराध की कमाई पैदा करने में मदद करने की उनकी भूमिका के लिए 18 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया. उन्हें प्रोडक्शन वारंट के आधार पर 21 सितंबर 2026 को पीएमएलओ मामलों की विशेष अदालत के सामने पेश किया गया. विशेष अदालत ने आगे की जांच के लिए ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की 14 दिन की कस्टडी ईडी को सौंप दी है.
18 अगस्त 2026 से 24 अगस्त 2026 के बीच की गई तलाशी के दौरान जब्त की गई सामग्री के विश्लेषण से पता चला कि उक्त आपराधिक गतिविधि से हुई कमाई को बाद में कई तरीकों से घुमाया-फिराया गया और इस्तेमाल किया गया. इन तरीकों में बैंक ट्रांसफर, सोने के गहने खरीदना, हवाई यात्रा के लिए नकद भुगतान और नकद लेनदेन शामिल थे. ऐसा इसलिए किया गया ताकि इस कमाई के स्वरूप और स्रोत को छिपाया जा सके और इसे साफ-सुथरी संपत्ति के तौर पर दिखाया जा सके.
वहीं, ईडी की ओर से इस मामले से संबंधित आगे की जांच जारी है.
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डीके/डीकेपी
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