
कोहिमा, 21 अक्टूबर . केंद्र ने नागालैंड Government से कहा है कि वह ‘Prime Minister विकास पहल – पूर्वोत्तर क्षेत्र’ (पीएम-डिवाइन) के तहत परियोजनाओं और ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय’ (एमडोनर) की योजनाओं को लागू करने को प्राथमिकता दे.
डोनर मंत्रालय के संयुक्त सचिव विपुल अग्रवाल ने नागालैंड Government के अधिकारियों के साथ एक बैठक की और पीएम-डिवाइन और एमडोनर के तहत चल रही परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की. उन्होंने राज्य से आग्रह किया कि वे 16वें वित्त आयोग के समक्ष पेश करने के लिए परियोजनाओं को प्राथमिकता दें. साथ ही, उन्होंने विभागों को सलाह दी कि वे अपनी प्राथमिकता सूची जमा करने के लिए अंतिम आवंटन आंकड़ों का इंतजार न करें.
अग्रवाल ने अक्टूबर के अंत तक प्रस्ताव जमा करने को कहा और स्पष्ट किया कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत बची हुई देनदारियों को 17वें वित्त आयोग में नहीं ले जाया जाएगा.
समय पर काम पूरा करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने को कहा. इसमें पुरानी परियोजनाओं और उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिन्हें अगले वित्तीय वर्ष तक पूरा किया जा सकता है.
डोनर मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने काम में तेजी लाने, जहां तक संभव हो परियोजनाओं की समय-सीमा कम करने, और सवालों तथा स्पष्टीकरणों का समय पर जवाब देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
अग्रवाल ने कहा कि पीएम-डिवाइन के तहत चल रही प्रमुख परियोजनाओं की बारीकी से निगरानी की जानी चाहिए और उन्हें जल्द पूरा करने के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने वस्तुनिष्ठ और जरूरत पर आधारित प्रस्ताव तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया, और एसडीजी (सतत विकास लक्ष्य) प्रदर्शन में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए लक्षित कदम उठाने का सुझाव दिया.
अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की प्रगति की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि नागालैंड को अपने सामाजिक-आर्थिक विकास को बेहतर बनाने और विकास परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है.
बैठक को संबोधित करते हुए, नागालैंड के प्रधान सचिव और विकास आयुक्त, वाई. किखेतो सेमा ने 1998 में डोनर मंत्रालय की स्थापना के बाद से नागालैंड को दी गई वित्तीय सहायता के लिए केंद्र Government और डोनर मंत्रालय का आभार व्यक्त किया.
हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य को मिली फंडिंग उसकी विकासात्मक जरूरतों के अनुपात में नहीं थी. सेमा ने बताया कि 1998 से 2025 के बीच नागालैंड को डोनर मंत्रालय से कुल 5,339.50 करोड़ रुपए मिले हैं, जो पूर्वोत्तर के कई अन्य राज्यों को मंजूर की गई राशि की तुलना में काफी कम है.
प्रधान सचिव ने बताया कि असम के बाद पूर्वोत्तर का दूसरा सबसे पुराना राज्य होने के बावजूद, नागालैंड को इस क्षेत्र में एमडोनर (पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय) से मिलने वाली फंडिंग सबसे कम पाने वाले राज्यों में तीसरे स्थान पर रखा गया है. उन्होंने राज्य की विकासात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक वित्तीय सहायता की मांग की.
उन्होंने कहा कि नागालैंड शांति, प्रगति और विकास के एक नए दौर की ओर देख रहा है. उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, सड़क संपर्क, शिक्षा और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर विकास की गति तेज करने पर जोर दिया.
सेमा ने कहा कि सरकारी नौकरियों के अवसर अब लगभग संतृप्ति के स्तर पर पहुंच गए हैं, इसलिए राज्य Government आजीविका और रोजगार के वैकल्पिक रास्ते तलाश रही है, खासकर युवाओं के लिए.
उन्होंने उद्यमिता को बढ़ावा देने, आय पैदा करने और टिकाऊ आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए कॉफी, चाय, रबर और अगरवुड जैसी व्यावसायिक फसलों की खेती, तथा इको-टूरिज्म की संभावनाओं पर प्रकाश डाला.
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एससीएच
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