केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने एनएफडीबी से एक सक्रिय विकास संस्थान के रूप में भूमिका को मजबूत करने का आह्वान किया

New Delhi, 6 नवंबर . Union Minister राजीव रंजन सिंह ने 2019-20 में 141.64 लाख टन से बढ़कर 197.75 लाख टन हुए मछली उत्पादन की सराहना की. Friday को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने उत्पादन और उत्पादकता को और बढ़ाने पर जोर दिया, साथ ही कहा कि नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड (एनएफडीबी) के भविष्य के कार्यों का आधार मापने योग्य परिणाम होने चाहिए.

राजीव रंजन सिंह ने एनएफडीबी से एक सक्रिय विकास संस्थान के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने को कहा, ताकि मछलीपालकों तक बेहतर पहुंच बनाई जा सके और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित हो सके.

उन्होंने परियोजनाओं को समय पर शुरू करने और पूरा करने तथा फंड का प्रभावी ढंग से उपयोग करने पर जोर दिया. इससे मछुआरों की आय और आजीविका की सुरक्षा भी बढ़ेगी. Union Minister ने पूर्वोत्तर और आंतरिक राज्यों को विशेष समर्थन देने का निर्देश दिया, जिससे उत्पादन, आपूर्ति और खपत के बीच के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में आसानी होगी.

मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने एक्वाकल्चर (जलीय कृषि) के विस्तार और सीफूड निर्यात को मजबूत करने में विभाग और राज्यों के प्रयासों पर प्रकाश डाला. वर्तमान में सीफूड निर्यात का मूल्य लगभग 70,000 करोड़ रुपये है.

उन्होंने एनएफडीबी की डिजिटल उपस्थिति को मजबूत करने और हितधारकों के लिए समर्थन तथा फीडबैक तंत्र को सरल बनाने पर जोर दिया. उन्होंने सहकारी समितियों, फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफएफपीओएस), स्टार्टअप्स और निजी उद्यमियों के माध्यम से अधिक निजी निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया.

उन्होंने मत्स्य पालन नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन और निरंतर सुधार के लिए राज्यों के साथ नियमित परामर्श और हितधारकों से फीडबैक लेने की आवश्यकता पर बल दिया. राजीव रंजन ने हैदराबाद में एनएफडीबी की 13वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक की अध्यक्षता की.

राज्यों के मत्स्य मंत्रियों ने मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया और मछली मंडियों तथा ‘इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क्स’ की स्थापना के लिए केंद्र से निरंतर समर्थन की मांग की. उन्होंने मत्स्य पालन विकास के लिए ‘अमृत सरोवरों’, जलाशयों और अन्य जल निकायों का उत्पादक उपयोग करने हेतु मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया.

मंत्रियों ने मछुआरों, उद्यमियों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और अधिकारियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोजर (अनुभव प्राप्त करने के अवसर) बढ़ाने की मांग की. इसके साथ ही, उन्होंने पीएमएमएसवाई (Prime Minister मत्स्य संपदा योजना) के लाभार्थियों को लगातार प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया.

उन्होंने पोषण पर केंद्रित जागरूकता अभियानों के माध्यम से मछली की खपत को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया. मुख्य कार्यकारी डॉ. विजय कुमार बेहरा ने एनएफडीबी द्वारा चलाई जा रही विभिन्न मत्स्य पालन गतिविधियों, योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत हुई प्रगति पर प्रकाश डाला और बोर्ड की गवर्निंग बॉडी को इस क्षेत्र के विकास के लिए किए जा रहे मौजूदा प्रयासों के बारे में जानकारी दी.

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एसडी/एएस