केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैसलमेर सैम डेजर्ट नेशनल पार्क में दो दुर्लभ ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ पक्षियों को छोड़ा

New Delhi, 4 अक्टूबर . केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने Sunday को Rajasthan के जैसलमेर में सैम डेजर्ट नेशनल पार्क में दो नर ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ पक्षियों को छोड़ा.

बस्टर्ड्स को छोड़ने के बाद मंत्री भूपेंद्र यादव ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “एक अहम कदम उठाते हुए, आज सुबह जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क के सैम इलाके में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स (जीआईबी) को छोड़ा गया. यह बड़ी कामयाबी हमारे वैज्ञानिकों, रिसर्चर्स और ग्राउंड स्टाफ की लगभग एक दशक की अटूट मेहनत से मुमकिन हो पाई है, जिन्होंने जीआईबी को Rajasthan के रेगिस्तान में फिर से बसाने के लिए सालों तक काम किया है.”

Union Minister ने Prime Minister मोदी का भी उनके मार्गदर्शन, हौसला-अफजाई और लगातार सहयोग के लिए धन्यवाद किया. उन्होंने कहा, “मैं पीएम मोदी का लगातार मार्गदर्शन, हौसला-अफजाई और सहयोग के लिए धन्यवाद करता हूं, जिससे हमारी वैज्ञानिक कम्युनिटी जीआईबी समेत सभी प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम कर पा रही है.”

इससे पहले Saturday को मंत्री यादव ने रामदेवरा में ब्रीडिंग सेंटर का दौरा किया और इस खास प्रजाति के संरक्षण के लिए काम कर रहे युवा रिसर्चर्स और वैज्ञानिकों की कोशिशों की तारीफ की.

उन्होंने संरक्षण कार्यक्रम में शामिल रिसर्चर्स की लगन और मेहनत की तारीफ की और कहा कि इस प्रोजेक्ट पर सालों से पूरे जोश के साथ काम किया जा रहा है. यादव ने एक्स पर पोस्ट किया, “जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क के सैम इलाके में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ को दोबारा जंगल में छोड़ने (रीवाइल्डिंग) के काम को शुरू करने से एक दिन पहले मैंने रामदेवरा में ब्रीडिंग सेंटर का दौरा किया. मैं हमारे युवा रिसर्चर्स और वैज्ञानिकों की मेहनत और लगन से बहुत प्रभावित हुआ, जिन्होंने सालों से पूरे जोश के साथ इस प्रोजेक्ट पर काम किया है और इस खास प्रजाति के संरक्षण के लिए असाधारण समर्पण दिखाया है.”

गौरतलब है कि ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ India की सबसे खास और गंभीर रूप से लुप्तप्राय (खतरे में पड़ी) पक्षी प्रजातियों में से एक है. इसे बचाने के लिए सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिकों, वन अधिकारियों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर एक खास संरक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है.

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “कैप्टिव-ब्रीडिंग (संरक्षित माहौल में प्रजनन) से पैदा हुए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ना, इस प्रजाति को बचाने के कार्यक्रम का अगला अहम कदम है. इससे कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा हुए पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस लाने के तरीकों (प्रोटोकॉल) को बेहतर बनाने और विकसित करने के लिए जरूरी वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी.”

इस कार्यक्रम में कैप्टिव ब्रीडिंग और संरक्षण की कोशिशें शामिल हैं, जिनका मकसद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की स्थिति को बेहतर बनाना और अंततः कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा हुए पक्षियों को जंगल में वापस भेजना है.

–

ओपी/पीएम