
वाशिंगटन, 28 अगस्त . आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर न्यूयॉर्क में ऐतिहासिक इस्कॉन स्थलों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि बढ़ते संघर्ष, विभाजन और परस्पर विरोधी पहचानों के बीच ‘कृष्ण चेतना’ मानवता को एकजुट कर सकती है.
भागवत ने कहा कि विश्व कृष्ण चेतना है. आज के विश्व में इतने संघर्ष और इतने द्वंद्व हैं. हमें एकजुट करने वाली एकमात्र चीज चेतना है और वह कृष्ण चेतना है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक भागवत ने अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना सोसायटी का दौरा किया और इसके संस्थापक एसी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद को श्रद्धांजलि अर्पित की.
उन्हें न्यूयॉर्क में इस्कॉन की शुरुआत और एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन में इसके परिवर्तन को दर्शाने वाली प्रदर्शनियां दिखाई गईं.
भागवत ने कहा कि हम सब एक हैं, और हमें इस संसार की इन द्वैतताओं से इस दृढ़ समझ के साथ गुजरना होगा कि यद्यपि इतनी विविधताएं, द्वैत और संघर्ष हैं, वास्तव में यह सब कृष्ण ही हैं. गीता हमें यही सिखाती है. भगवद गीता लोगों को संसार से अलग होने या अपने दायित्वों को त्यागने के लिए नहीं कहती. जीवन से भागो मत. दृढ़ रहो. अपना कर्तव्य निभाओ. क्योंकि सब कुछ कृष्ण ही हैं.
भागवत ने कहा कि यदि यह संदेश प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंच जाए तो संसार का रूपांतरण हो सकता है. यदि यह संदेश प्रत्येक हृदय तक पहुंच जाए तो संसार निश्चित रूप से बेहतर बन जाएगा. यह वह भौतिक संसार नहीं होगा जो हम आज देखते हैं. यह प्रत्येक मनुष्य के लिए स्वर्गलोक होगा.
उन्होंने इस्कॉन को उसकी 60वीं वर्षगांठ पर बधाई दी और उल्लेख किया कि आरएसएस अपनी शताब्दी मना रहा है.
भागवत ने कहा कि ये संगठन अलग-अलग तरीकों से और अलग-अलग परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, लेकिन सभी एक ही चेतना का प्रसार करने में लगे हुए हैं. हम सभी अलग-अलग तरीकों से, अलग-अलग परिस्थितियों में अपने-अपने विशेष तरीकों से कृष्ण चेतना का प्रसार करने का एक ही कार्य कर रहे हैं.
इस्कॉन की शासी निकाय समिति के सदस्य और गोवर्धन इको विलेज के निदेशक गौरंगा दास ने कहा कि भागवत ने संगठन को सनातन और हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया.
भागवत ने मैनहट्टन स्थित 26 सेकंड एवेन्यू का भी दौरा किया, जहां प्रभुपाद ने 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी. उन्होंने पुष्प अर्पित कर आध्यात्मिक गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की.
दास ने कहा कि साठ वर्ष पहले इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य, परम पूज्य एसी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने 1966 में यहां इस्कॉन की स्थापना की थी. यह प्रसिद्ध पता मैनहट्टन स्थित 26 सेकंड एवेन्यू है. भागवत ने 80 भाषाओं में भगवद गीता की 60 करोड़ प्रतियां वितरित करने और 120 देशों में 1,300 मंदिर स्थापित करने के लिए इस्कॉन की प्रशंसा की. उन्होंने संगठन को विश्वभर के परिवारों तक सनातन धर्म का संदेश पहुंचाने के लिए भी प्रोत्साहित किया.
यात्रा के दौरान, भागवत ने आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करते हुए इस स्थल को एक प्रेरणादायक स्थान बताया, जिसने कृष्ण चेतना का ‘अतुलनीय उपहार’ विश्व को दिया. उन्होंने लिखा कि वे स्वयं को विनम्र महसूस कर रहे हैं और प्रत्येक व्यक्ति और वस्तु में विद्यमान दिव्य उपस्थिति के प्रति ‘शुद्ध सात्विक प्रेम की भावना से परिपूर्ण’ हैं.
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एमएस/एबीएम
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