
उत्तराखंड, 3 सितंबर . उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित मां दूनागिरी मंदिर आस्था और अध्यात्म का एक प्रमुख केंद्र है. अल्मोड़ा जिले के द्वारहाट क्षेत्र में ऊंची पहाड़ी पर बसा यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है. साथ ही, यह कुमाऊं क्षेत्र का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वैष्णवी शक्तिपीठ में से एक है.
इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं लेकिन मान्यता है कि सच्चे मन से दर्शन करने वालों की हर मनोकामना पूरी होती है. पौराणिक कथाओं से जुड़ा यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है.
उत्तराखंड के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने Thursday को भी मंदिर की भव्यता के बारे में बताया. साथ ही, लोगों से एक बार मंदिर दर्शन करने की अपील की. उन्होंने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, “अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट इलाके में मौजूद मां दूनागिरी मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सुंदरता का एक दिव्य संगम है. मां आदिशक्ति भगवती को समर्पित यह पवित्र धाम अनगिनत भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है. नवरात्रि के पावन मौके पर यहां खास पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं, जिसके दौरान भक्त दूर-दूर से माँ के दर्शन के लिए आते हैं. अल्मोड़ा जिले में आने पर इस दिव्य मंदिर के दर्शन जरूर करें.”
मां दूनागिरी मंदिर, में मां दुर्गा के वैष्णवी रूप (मां दूनागिरी देवी) की पिंडी रूप में पूजा की जाती है. इसे कुमाऊं क्षेत्र का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वैष्णवी शक्तिपीठ माना जाता है.
रामायण का इतिहास रामायण और महाIndia काल से जुड़ा माना जाता है. इसके अनुसार, जब हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाने वास्ते द्रोणागिरी पर्वत को ले जा रहे थे, तब इस पर्वत का एक हिस्सा यहां गिरा था. ऐसा भी कहा जाता है कि पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य ने यहां तपस्या की थी.
India के ज्यादातर देवी मंदिर में नारियल फोडने की प्रथा रहती है, लेकिन इस मंदिर ऐसा नहीं किया जाता है. दरअसल, यहां चढ़ाए जाने वाले प्रसाद (सूखे नारियल) को तोड़ा नहीं जाता है, बल्कि श्रद्धालुओं को साबुत वापस दिया जाता है. मंदिर परिसर में निरंतर भंडारे का आयोजन किया जाता है.
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एनएस/पीएम
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