
जालंधर, 31 अक्टूबर . भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने Chief Minister भगवंत मान की Government को सहकारी बैंकों के कर्ज संबंधी नियमों के जरिए किसानों पर भारी बोझ डालने के लिए घेरा है.
सुनील जाखड़ ने यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पिछले दिनों जब किसान यूनियनों ने कृषि ऋण सहित विभिन्न कृषि मांगों को लेकर चंडीगढ़ में धरना दिया था, तब पंजाब Government की ओर से कृषि मंत्री ने 7 सितंबर को लिखित आश्वासन दिया था कि सहकारी बैंकों के कृषि ऋण के संबंध में एकमुश्त निपटान योजना (ओटीएस) लाने के लिए विधानसभा में कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि विधानसभा का पिछला सत्र भी बीत चुका है, लेकिन यह योजना नहीं आई.
इससे पहले जून में Chief Minister भगवंत सिंह मान ने किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा बढ़ाने और इस योजना के तहत अन्य विभिन्न फसलों के लिए भी कर्ज देने की नीति की घोषणा की थी.
जाखड़ ने कहा कि इन दावों के विपरीत सहकारी बैंकों में न तो एक भी किसान का नया खाता खुला और न ही ऋण सीमा बढ़ी. इसके विपरीत 11 जिला भूमि बंधक बैंक पांच महीनों से बंद पड़े हैं और किसान तथा कर्मचारी दोनों इन बैंकों के बाहर धरनों पर बैठे हैं.
सुनील जाखड़ ने कहा कि इससे भी बड़ा अन्याय यह है कि मान Government ने सहकारी बैंकों के ऋण संबंधी नियमों में बड़ा बदलाव करके किसानों पर न केवल आर्थिक बोझ डाला है, बल्कि सहकारी बैंकों से कर्ज लेने की प्रक्रिया इतनी कठिन बना दी है कि किसान कर्ज ले ही न सकें.
उन्होंने बताया कि पहले सहकारी बैंकों से सहकारी समितियों के माध्यम से कर्ज लेने वाले किसानों को एक लाख रुपए तक के कर्ज के लिए 3,300 रुपए और दो लाख रुपए के कर्ज के लिए 5,000 रुपए की हिस्सेदारी जमा करवानी पड़ती थी, लेकिन मान Government ने यह हिस्सेदारी बढ़ाकर एक लाख रुपए के कर्ज के लिए 6,000 रुपए और दो लाख रुपए के कर्ज के लिए 9,000 रुपए कर दी है. उन्होंने कहा कि अब किसानों को बैंक से कर्ज लेने के लिए पहले यह राशि जमा करवानी पड़ेगी.
उन्होंने इससे भी अधिक कठिनाई वाली बात का जिक्र करते हुए कहा कि पहले यह हिस्सेदारी सहकारी समिति में जमा करवाई जाती थी और किसान जब भी अपना खाता बंद करता था तो आसानी से अपनी हिस्सेदारी वापस ले सकता था लेकिन नए आदेशों के तहत यह हिस्सेदारी बैंक में जमा करवानी होगी, जहां से इसे वापस लेना भी किसान के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा.
इसी तरह पंजाब Government के एक और किसान विरोधी फैसले की जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले सहकारी बैंकों से लिए जाने वाले कर्ज के लिए किसानों को सहकारी समिति या बैंक के पास जमीन गिरवी नहीं रखनी पड़ती थी, लेकिन अब Government ने नियम बना दिया है कि कर्ज लेने के लिए किसान को अपनी जमीन गिरवी रखनी पड़ेगी.
उन्होंने बताया कि पहले यदि किसान ने किसी दूसरे बैंक से भी किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया हुआ था, तब भी उसे ब्याज में चार प्रतिशत की छूट मिल रही थी, लेकिन नए नियमों के अनुसार यह छूट समाप्त कर दी गई है. उन्होंने कहा कि इस तरह किसान को कर्ज लेने के लिए पहले अपनी हिस्सेदारी के रूप में अधिक राशि जमा करवानी पड़ेगी. इसके साथ ही कर्ज लेने की प्रक्रिया कठिन बना दी गई है और जमीन गिरवी रखने के बावजूद अब उसे महंगा कर्ज मिलेगा.
सुनील जाखड़ ने कहा कि वास्तव में Government ने बैंकों के पास पैसा छोड़ा ही नहीं है, जिसके कारण उनके पास किसानों को कर्ज देने के लिए धन ही नहीं है. उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग Chief Minister के पास है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी भी Chief Minister की ही बनती है.
उन्होंने कहा कि एक ओर किसानों को गेहूं की बुआई करनी है और बीज, खाद तथा डीजल की खरीद के लिए पैसे चाहिए, लेकिन किसान एक तरफ धान बेचने के लिए मंडियों में लूटे जा रहे हैं और कटौती लगाकर धान की खरीद की जा रही है तो दूसरी तरफ उन्हें अगली फसल के लिए जरूरी सामग्री खरीदने हेतु सहकारी बैंकों से कर्ज नहीं मिल रहा.
सुनील जाखड़ ने कहा कि पंजाब के लोग किसान विरोधी भगवंत मान Government से बेहद दुखी हैं, लेकिन यह Government किसानों की मुश्किलें सुनने के बजाय ‘छल्ला’ गाने में मस्त है.
दूसरी ओर, उन्होंने India Government की किसान सम्मान निधि योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि केंद्र Government की ओर से 9 करोड़ 34 लाख किसानों के खातों में नई किस्त के रूप में 18,500 करोड़ रुपए पहले ही भेजे जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत मोदी Government अब तक किसानों को 4 लाख 60 हजार करोड़ रुपए दे चुकी है.
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एएसएच/
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