
वाराणसी, 20 सितंबर . सार्वजनिक जीवन में Prime Minister Narendra Modi के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य पर ‘जीआई मैन’ के नाम से प्रसिद्ध पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने उनकी कार्यशैली और नेतृत्व की सराहना की है. उन्होंने कहा कि बनारस में हुए बदलाव और जीआई की मदद से व्यापार बढ़ा है और पीएम मोदी की जीआई टैगिंग और कल्याणकारी योजनाओं ने देश के जमीनी स्तर के समुदायों को सशक्त बनाया है.
दरअसल, Prime Minister मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार Gujarat के Chief Minister के रूप में शपथ ली थी. इस मील के पत्थर का जश्न मनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक राष्ट्रव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है. 7 अक्टूबर को पीएम मोदी सीएम और पीएम जैसे महत्वपूर्ण पदों पर 25 वर्ष पूरे कर लेंगे.
वाराणसी में से बात करते हुए पद्म श्री डॉ. रजनीकांत ने काशी के जीआई मॉडल की सफलता पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा, “अगर हम काशी और उसके आसपास के जिलों को मिलाकर देखें तो जीआई-टैग वाले 32 उत्पाद सालाना लगभग 25,500 करोड़ रुपए का कारोबार करते हैं. इस इकोसिस्टम से लगभग 20 से 24 लाख लोग सीधे और परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं.”
उन्होंने बताया, “इन फायदा उठाने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं, अल्पसंख्यक और दलित समुदायों के लोग, कारीगर, कुशल कामगार और ओबीसी समुदायों के लोग शामिल हैं. इससे जीआई इकोसिस्टम न सिर्फ आर्थिक रूप से सफल हुआ है, बल्कि यह आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण का एक अहम जरिया भी बन गया है. नतीजतन, काशी जीआई मॉडल को अब आगे बढ़ाया जा रहा है और India के अलग-अलग हिस्सों में भी अपनाया जा रहा है. ये 32 जीआई टैग मोटे तौर पर हमारी विरासत के तीन अहम पहलुओं को दर्शाते हैं- शिल्प, खान-पान और संस्कृति.”
डॉ. रजनीकांत ने काशी की विरासत को याद करते हुए कहा, “मुझे यह कहते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि हम दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक में बैठे हैं. एक ऐसा शहर जिसे अक्सर ‘इतिहास से भी पुराना’ कहा जाता है. काशी, बनारस, वाराणसी हजारों साल पुराना, प्राचीन होते हुए भी जीवंत शहर. इसने शिल्प, कला, परंपराओं और हुनर की अद्भुत विविधता को संजोकर रखा है, और यहां के हुनरमंदों की कला पूरे India और दुनिया में फैली हुई है.”
उन्होंने कहा, “जीआई के क्षेत्र में काशी ने लंबा सफर तय किया है. जब Narendra Modi काशी से सांसद बने और 2014 में India के Prime Minister का पद संभाला, तो यह उस क्षेत्र के लोगों के लिए गर्व का क्षण था. उस समय, बनारस और उसके आस-पास के इलाकों के पास केवल दो जीआई टैग थे, बनारसी साड़ी और भदोही कालीन, लेकिन आज काशी और आसपास के जिलों में 32 जीआई उत्पाद हैं, जो कारीगरों और बुनकरों की जिंदगी बदल रहे हैं. पीएम मोदी की वजह से बनारसी उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है और स्थानीय व्यापार को नई उड़ान मिली है.”
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एससीएच/
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