कार्बी शांति समझौते की वर्षगांठ पर बोले हिमंत सरमा, संघर्ष से विकास की ओर बढ़ा क्षेत्र

गुवाहाटी, 4 सितंबर . असम के Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा ने Friday को ऐतिहासिक कार्बी शांति समझौते पर हस्ताक्षर की घटना को याद करते हुए इसे राज्य के सामाजिक और Political परिदृश्य को बदलने वाला महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा कि इस समझौते ने कार्बी आंगलोंग में शांति, स्थिरता और विकास के एक नए दौर की शुरुआत की, जिससे क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही अशांति और उग्रवाद की समस्याओं को समाप्त करने में मदद मिली.

social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि यह समझौता असम की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बिना कार्बी लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं को पूरा करते हुए सालों के संघर्ष से स्थायी सद्भाव की ओर एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है.

Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि आज हम कार्बी शांति समझौते पर ऐतिहासिक हस्ताक्षर का जश्न मना रहे हैं. यह एक ऐसा अहम पड़ाव जिसने असम के सामाजिक-Political परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया और संघर्ष से स्थायी सद्भाव की ओर एक नया अध्याय शुरू किया.

इस समझौते ने क्षेत्र के लिए नए अवसर खोले हैं, जिनमें बुनियादी ढांचे का विकास और लक्षित आदिवासी कल्याण कार्यक्रमों से लेकर युवाओं, कला और स्थानीय उद्यमिता के लिए रास्ते शामिल हैं.

सरमा ने कहा कि जैसे-जैसे कार्बी आंगलोंग समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, हम शांति और एकता की उस भावना को सलाम करते हैं जिसने इस समझौते को संभव बनाया. यह इस बात का एक शानदार उदाहरण है कि कैसे बातचीत एक मजबूत भविष्य का निर्माण करती है. असम Government क्षेत्र के तेजी से विकास और लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही उनकी विशिष्ट पहचान की रक्षा भी कर रही है.

कार्बी शांति समझौते पर 4 सितंबर, 2021 को New Delhi में केंद्र, असम Government और कार्बी समूहों के प्रतिनिधियों के बीच हस्ताक्षर किए गए थे.

यह समझौता कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में कार्बी उग्रवादी संगठनों से जुड़े सालों के विद्रोह और हिंसा के बाद हुआ था.

इस समझौते में सशस्त्र कैडरों के पुनर्वास और बसावट, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के लिए अधिक प्रशासनिक और Political शक्तियां, और क्षेत्र के लिए एक विशेष विकास पैकेज का प्रावधान किया गया था.

इस समझौते का उद्देश्य पूर्व उग्रवादियों को मुख्यधारा में लाना और पहाड़ी जिलों में स्थायी शांति और विकास के लिए परिस्थितियां बनाना था.

समझौते के बाद विभिन्न कार्बी सशस्त्र समूहों से जुड़े सैकड़ों कैडरों ने हथियार डाल दिए और शांति प्रक्रिया में शामिल हो गए. इस समझौते को बातचीत और संवैधानिक तंत्र के माध्यम से कार्बी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया.

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