
गुवाहाटी, 2 सितंबर . असम के Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा ने Wednesday को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के इको-सेंसिटिव जोन में प्रस्तावित बदलावों को लेकर कांग्रेस के विरोध पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा की सुरक्षा social media पोस्ट या Political प्रदर्शनों से नहीं हो सकती.
कांग्रेस के अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम सरमा ने कहा कि कांग्रेस नेता और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई काजीरंगा की रक्षा नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिरकार वहां और उसके आसपास रहने वाले लोगों की है.
उन्होंने कहा, “गौरव गोगोई काजीरंगा की रक्षा नहीं कर सकते. काजीरंगा की सुरक्षा इंस्टाग्राम पर नहीं होगी. स्थानीय लोगों को ही काजीरंगा की रक्षा करनी होगी.”
Chief Minister ने कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने की भी आलोचना की और कहा कि कांग्रेस को काजीरंगा पर बोलने का अधिकार नहीं है.
उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर शर्म नहीं है तो कांग्रेस बोले.” साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे को उठाने में शर्म महसूस करने की कोई वजह नहीं है.
यह बयान ऐसे समय आया है जब काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के इको-सेंसिटिव जोन को कम करने के प्रस्ताव को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है.
असम Government ने काजीरंगा के आसपास प्रस्तावित या मौजूदा 10 किलोमीटर के ईएसजेड दायरे को कम करने का प्रस्ताव रखा है. राज्य Government अलग-अलग क्षेत्रों में करीब 1 से 3 किलोमीटर तक का बफर जोन रखना चाहती है.
कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है. पार्टी का कहना है कि ईएसजेड को कम करने से काजीरंगा के आसपास पर्यावरण सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है और क्षेत्र पर व्यावसायिक तथा विकास संबंधी दबाव बढ़ सकता है.
अगस्त में एपीसीसी अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कोहोरा में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था और Government से यह प्रस्ताव वापस लेने की मांग की थी.
गोगोई ने काजीरंगा से जुड़े क्षेत्रों में कथित अवैध खनन और राज्य वन्यजीव बोर्ड में कुछ सदस्यों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं.
उनका कहना है कि ईएसजेड में बदलाव करने से पहले पर्यावरण और खनन से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए.
इस विवाद में स्थानीय लोगों की भी भागीदारी देखने को मिली है. काजीरंगा के आसपास रहने वाले कई समूहों और निवासियों ने Government के प्रस्ताव का समर्थन किया है. उनका मानना है कि ईएसजेड की सीमा तय करने में स्थानीय लोगों की अधिक भागीदारी होनी चाहिए.
काजीरंगा क्षेत्र के कई निवासियों ने कांग्रेस की बड़ी बफर जोन की मांग के खिलाफ बैठकें और विरोध प्रदर्शन भी किए हैं.
वहीं, कांग्रेस ने अपने आंदोलन को काजीरंगा से आगे बढ़ाते हुए 29 अगस्त को सोनितपुर, लखीमपुर, तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट समेत कई जिलों में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और पदयात्राएं आयोजित कीं. पार्टी ने ईएसजेड कम करने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग दोहराई.
इस तरह यह विवाद अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि संरक्षण, विकास और काजीरंगा के आसपास रहने वाले समुदायों के अधिकारों को लेकर एक बड़े Political संघर्ष का रूप ले चुका है.
Chief Minister सरमा के ताजा बयान से भाजपा Government और कांग्रेस के बीच काजीरंगा के भविष्य को लेकर टकराव और तेज होने की संभावना है.
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एएमटी/डीकेपी
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