
चंडीगढ़, 29 अगस्त . पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) Government द्वारा महंगाई भत्ता जारी करने की मांग को लेकर इस सप्ताह एक दिन की सामूहिक आकस्मिक छुट्टी पर गए लगभग तीन लाख कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इसके बाद राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने Saturday को Chief Minister भगवंत सिंह मान को उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने की चेतावनी दी.
उन्होंने मान को चेतावनी दी कि यह Chief Minister के रूप में उनका आखिरी दिन साबित हो सकता है.
इसी से संबंधित एक घटनाक्रम में, कर्मचारी सांझा मुलाजम मंच ने Governor गुलाब चंद कटारिया से संपर्क कर Chief Minister के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, क्योंकि वे 27 अगस्त को हड़ताल के दिन उनके साथ प्रस्तावित बैठक में शामिल नहीं हुए थे.
उन्होंने मांग की है कि Chief Minister मान की अनुपस्थिति के लिए उनके एक दिन के वेतन में कटौती की जाए.
वडिंग ने यहां मीडिया से कहा कि जब तक कर्मचारी इसे कानूनी रूप से कर रहे हैं, यह विरोध उनका लोकतांत्रिक अधिकार है.
उन्होंने कहा कि आप कार्रवाई की धमकियों का इस्तेमाल करके उन्हें डरा-धमका नहीं सकते. उन्होंने Chief Minister को कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के अपने अधिकार का प्रयोग करने की चुनौती दी.
उन्होंने जोर देकर कहा कि Chief Minister (भगवंत मान) के लिए इसके दूरगामी परिणाम होंगे, जिनकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी.
इस बीच, Governor को दिए गए ज्ञापन में कर्मचारी संघ ने Chief Minister मान पर “सरकारी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही, प्रशासनिक मनमानी और सार्वजनिक धन की बर्बादी” का आरोप लगाया.
कर्मचारी संघ ने कहा कि यदि नियम और अनुशासन निचले स्तर के कर्मचारियों पर लागू होते हैं, तो Government में उच्च पदों पर आसीन लोगों को इनसे छूट नहीं मिल सकती.
27 अगस्त को पंजाब भर में सरकारी सेवाएं प्रभावित हुईं, लगभग सभी विभागों, बोर्डों और निगमों के तीन लाख से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर चले गए.
लगभग चार लाख पेंशनभोगी भी उनके साथ शामिल हो गए.
“महा हड़ताल” का प्रभाव सरकारी अस्पतालों, औषधालयों और शैक्षणिक संस्थानों में भी देखा गया.
हालांकि, बाजारों, निजी प्रतिष्ठानों, निजी और सार्वजनिक परिवहन बसों के संचालन और आपातकालीन सेवाओं को बंद से छूट दी गई थी.
कर्मचारी संघों के अनुसार, उनका 20,161 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता बकाया है. इसमें से 6,000 करोड़ रुपए 2021 से बकाया हैं, जबकि 14,161 करोड़ रुपए 2021 से पहले के हैं, जिस वर्ष पंजाब में आम आदमी Government सत्ता में आई थी.
कर्मचारियों को मूल वेतन का 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि उनका दावा है कि यह 58 प्रतिशत होना चाहिए.
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एमएस/
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