कांग्रेस नेताओं ने अल्बानिया घटना से भारत की तुलना को नकारा, कहा- आंदोलन गांधी के रास्ते पर ही होगा

New Delhi, 20 अक्टूबर . शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत द्वारा एक्स पर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी हैं. संजय राउत ने अल्बानिया के Supreme Court को जलाए जाने का जिक्र करते हुए सुझाव दिया कि India को ऐसी घटनाओं से सबक लेना चाहिए.

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, “पूरी दुनिया में जहां-जहां भी अन्याय होगा, अत्याचार होगा, अनाचार होगा, कदाचार होगा, वहां की जनता अपने-अपने एस्टैब्लिशमेंट के खिलाफ खड़ी होती है. हिंदुस्तान में अलग तरीके की बात है, हमारा प्रजातंत्र अलग तरीके का है, लेकिन जनता में रोष है, रोष को व्यक्त करने का तरीका अलग तरीके का है. हम Government को चेतावनी देना चाहते हैं कि जंतर-मंतर जैसी जगह बंद मत कीजिए, ताकि लोग अपना रोष व्यक्त कर सकें. प्रतिरोध के स्वर को सुनिए, प्रतिरोध की जगहों को खत्म मत कीजिए. दुनिया में जो हो रहा है, उसको आंख खोलकर देखिए, क्योंकि पूरी दुनिया में जो भी चीजें होती हैं, वह सारी की सारी चीजें कहीं न कहीं एक दूसरे से रिलेटेड होती हैं.”

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा, “अल्बानिया की व्यवस्था अलग है और यहां की व्यवस्था अलग है. वहां महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर नहीं थे. वहां जो कुछ हो रहा है, उसका हमारे देश में समर्थन करने की कोई जरूरत नहीं है. यहां कोई भी आंदोलन केवल उसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा, जो महात्मा गांधी ने दिखाया है. संजय राउत भी उस तरह के किसी आंदोलन की बात नहीं कर रहे हैं. वे बस इतना कह रहे हैं कि हालात इस हद तक नहीं पहुंचने चाहिए कि कुछ भी हो जाए. लेकिन जो लोग जानबूझकर यह नैरेटिव फैला रहे हैं कि India में भी बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात पैदा हो जाएंगे तो ऐसा यहां कुछ भी नहीं होने वाला है.”

वहीं, संजय राउत ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा, “यह Government रहेगी तो अराजकता फैलेगी ही. यही मैंने कहा था और Supreme Court को ध्यान देना चाहिए. जब हम कहते हैं कि Supreme Court पर हमारा विश्वास है और Supreme Court ही देश को बचा सकता है, जिस प्रकार से इस देश में केंद्र Government तिरंगा लहराने पर भी विरोध कर रही है, उसका मतलब क्या है? यह राष्ट्रवादी, राष्ट्रभक्तों की Government नहीं है. अगर हम हमारे देश में तिरंगा नहीं लहरा सकते तो क्या कर सकते हैं? किसका झंडा हम लहराएंगे? Supreme Court को इस पर ध्यान देना चाहिए.”

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ओपी/डीकेपी