कांग्रेस की ‘मॉक पार्लियामेंट’ की तैयारी, विपक्ष की बैठक में ‘सीईसी पर महाभियोग’ के प्रस्ताव पर चर्चा

New Delhi, 29 अक्टूबर . चुनाव आयोग (ईसी) के ‘मनमानी’ निर्णयों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में अनियमितताओं के खिलाफ कड़ा विरोध जताते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष Friday को ‘मॉक पार्लियामेंट’ आयोजित करने जा रहा है, जहां वह मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाने की मांग करेगा.

खबरों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर Friday को इंडिया ब्लॉक द्वारा सांकेतिक संसद सत्र आयोजित किया जाएगा. इसमें विपक्षी सांसद जनता की अदालत में अपनी राय रखेंगे और बाद में मुख्य आयुक्त के महाभियोग के पक्ष में मतदान करेंगे.

पूर्व Lok Sabha अध्यक्ष मीरा कुमार के सांकेतिक संसद सत्र की अध्यक्षता करने की संभावना है, जबकि विपक्षी ब्लॉक के सांसद मुख्य आयुक्त के महाभियोग का पक्ष रखेंगे.

खड़गे ने Thursday को प्रेस से बात करते हुए सांकेतिक संसद के विचार का समर्थन किया और इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में जनता को जगाने के लिए आंदोलन आवश्यक है, इसीलिए कांग्रेस Government और चुनाव आयोग की मिलीभगत को उजागर करने पर तुली हुई है.

यह कदम भले ही प्रतीकात्मक हो, लेकिन विपक्ष का दृढ़ मत है कि यह चुनाव आयोग के प्रति व्यापक चुनावी अनियमितताओं को लेकर जनता की गहरी भावना और असंतोष को दर्शाता है.

सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि ‘सांकेतिक संसद’ जनता की आकांक्षाओं और मांगों का प्रतिबिंब है, न कि कोई प्रचार का हथकंडा. वामपंथी सांसद ने एक कदम आगे बढ़कर विस्तार से बताया कि इंडिया ब्लॉक मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त को सार्वजनिक अदालत में महाभियोग चलाने का इरादा रखता है. उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी दल ने विपक्ष की आवाज को बार-बार नजरअंदाज किया है और कुचल दिया है.

ब्रिटास ने पत्रकारों से कहा, “इससे जनता की आकांक्षाएं प्रतिबिंबित होंगी. हमारी एक विधिवत महाभियोग प्रक्रिया होगी, जिसमें एक पीठासीन अधिकारी होगा. Lok Sabha की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार इस सांकेतिक संसद की अध्यक्षता करेंगी. विभिन्न दलों के प्रतिनिधि अपने विचार प्रस्तुत करेंगे.”

सीपीआई(एम) सांसद ने आगे बताया, “राज्यसभा में विपक्ष के नेता (मल्लिकार्जुन खड़गे) प्रस्ताव पेश करेंगे और Lok Sabha में विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) चर्चा का समापन करेंगे. नागरिक समाज के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे और एसआईआर के पीड़ित भी आकर अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे.”

–

एएसएच/डीकेपी