कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे प्रधानमंत्री मोदी से माफी मांगें: संजय निरुपम

Mumbai , 28 अक्टूबर . शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने Prime Minister Narendra Modi को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि खड़गे को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए. इसके अलावा, निरुपम ने Maharashtra में सूखे से प्रभावित किसानों के लिए राज्य Government की ओर से घोषित सहायता पैकेज को राहत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. वहीं, कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद चुनावों में भी कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई.

संजय निरुपम ने कहा कि Maharashtra के पूर्व Chief Minister पृथ्वीराज चव्हाण ने भी खड़गे की टिप्पणी की आलोचना की है. खड़गे ने Patna में एक कार्यक्रम के दौरान Prime Minister Narendra Modi और उनके दिवंगत पिता को लेकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा कि Political विवाद में Prime Minister के पिता को शामिल करना उचित नहीं है और कांग्रेस अध्यक्ष का बयान उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं था.

निरुपम ने कहा कि खड़गे की टिप्पणी के बाद भाजपा और शिवसेना की ओर से उनसे माफी मांगने की मांग की गई है. उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण के बयान का हवाला देते हुए कहा कि Maharashtra के पूर्व Chief Minister ने भी माना है कि खड़गे को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था. चव्हाण वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं. उनके द्वारा खड़गे की आलोचना किया जाना कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर गंभीर सवाल खड़े करता है. खड़गे की भाषा पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए निरुपम ने कहा कि उन्हें Prime Minister मोदी और उनके पिता के लिए इस्तेमाल किए गए अपशब्दों पर माफी मांगनी चाहिए. सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपनी भाषा और पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए.

Maharashtra में सूखे से प्रभावित किसानों के लिए राज्य Government की ओर से घोषित सहायता राशि पर संजय निरुपम ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में गंभीर सूखे के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं. Maharashtra के 36 जिलों में से लगभग 20 से 25 जिलों में अकाल जैसी स्थिति पैदा हुई थी, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. Chief Minister देवेंद्र फडणवीस, उपChief Minister एकनाथ शिंदे और Government के अन्य प्रतिनिधियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. उनकी पार्टी के कई जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों ने भी खेतों में जाकर किसानों से मुलाकात की और नुकसान का आकलन किया. उन्होंने कहा कि केंद्र Government की एक टीम भी Maharashtra पहुंची थी, जिसने किसानों से बातचीत करने के बाद स्थिति का जायजा लिया.

शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि राज्य Government ने आश्वासन दिया था कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद किसानों को सहायता दी जाएगी, ताकि उनकी दिवाली अंधेरे में न गुजरे. इसी घोषणा को लागू करते हुए Maharashtra कैबिनेट ने 7,500 करोड़ रुपए के सहायता पैकेज की घोषणा की है. इसके तहत प्रत्येक किसान को कम से कम 5,000 रुपए की सहायता देने की योजना है, जिससे वे त्योहार मना सकें और तत्काल जरूरतें पूरी कर सकें.

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सहायता अंतिम नहीं है. निरुपम ने कहा कि आने वाले दिनों में Government किसानों की खेती से जुड़ी दूसरी जरूरतों पर भी विचार करेगी. इसमें बैंक ऋण, बीज, खाद और बिजली बिलों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं. Government का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदा से उबरने में मदद देना और उन्हें दोबारा खेती के लिए तैयार करना है.

कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ वाले आरोपों पर सवाल उठाते हुए संजय निरुपम ने विधान परिषद के चुनाव परिणामों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि विधान परिषद की 28 सीटों के लिए चुनाव हुए, लेकिन कांग्रेस किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई. इन चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ था और ईवीएम का प्रयोग नहीं किया गया था. इन चुनावों में मतदाता स्नातक और शिक्षक वर्ग से जुड़े थे. कांग्रेस को इस परिणाम पर विचार करना चाहिए कि वह इन वर्गों के बीच भी अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर सकी. उन्होंने यह भी कहा कि केवल सत्ता में होने के आधार पर जीत सुनिश्चित नहीं होती. निरुपम ने कर्नाटक का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि वहां भी पार्टी जीत दर्ज नहीं कर पाई.

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी हार के लिए कभी ईवीएम, कभी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और कभी चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराती है. पार्टी को अपनी Political रणनीति और चुनावी अभियान की समीक्षा करनी चाहिए, न कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर अपनी हार का कारण बताना चाहिए. निरुपम ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस इसी तरह चुनावी नतीजों के लिए संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराती रही और अपने अभियान में बदलाव नहीं किया, तो 2029 तक उसके पास बचे कुछ राज्यों में भी जनता उससे सत्ता छीन सकती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर पुनर्विचार करना चाहिए और चुनावी परिणामों से सबक लेना चाहिए.

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