
New Delhi, 7 नवंबर . कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के बाबरी मस्जिद पर दिए एक बयान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. BJP MP सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेसियों के दिल में कल भी बाबर था और आज भी. सोनिया गांधी बताएं कि उन्हें किन-किन बातों पर आंसू निकले थे.
New Delhi में मीडिया से बातचीत के दौरान BJP MP सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का राम विरोधी चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है, जिसने India की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने के लिए रामलीला मैदान में भारत-विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाया था. उन्होंने कहा कि आज ऐसी खबरें आईं कि 6 दिसंबर 1992 को सोनिया गांधी की आंखों में आंसू आ गए थे. बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकवाद के आरोपियों के लिए उनकी आंखों में आंसू आ गए थे, लेकिन जब संसद भवन की रक्षा में अपनी जान कुर्बान करने वाले बहादुरों ने अपने मेडल वापस कर दिए, क्योंकि अफजल गुरु को फांसी नहीं दी जा रही थी, तब सोनिया गांधी की आंखों से एक भी आंसू नहीं गिरा.
BJP MP ने कहा कि ये वही सोनिया गांधी हैं जो गाजा को लेकर दुखी नजर आई थीं. ये वही सोनिया गांधी हैं, जिनके दौर में 1992 के दंगों के बाद लाखों लोग बेघर हो गए, Pakistan और बांग्लादेश में सैकड़ों मंदिर तोड़ दिए गए, और महिलाओं के साथ जो कुछ भी हुआ उसके लिए तसलीमा नसरीन ने ‘लज्जा’ किताब लिखी है. उस पर कांग्रेस को जरा भी शर्म नहीं आई, बल्कि उनके शासनकाल में तो तसलीमा नसरीन को प्रेस कॉन्फ्रेंस तक नहीं करने दी गई. फिर भी आज, इस बात पर आंसू बहाए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अयोध्या में दीपोत्सव का नया कीर्तिमान स्थापित किया जा रहा है. यह दर्शाता है कि कांग्रेस के दिल में तब भी बाबर था, आज भी बाबर ही है, और तीन पीड़ियों ने बाबर के कब्र पर सजदा किया है. इसके बावजूद आपके दिल में क्या था, वह जुबान पर आ गया है.
उन्होंने कहा कि मैं सोनिया गांधी से बहुत विनम्रता से पूछता हूं कि आपने किस भारतीय टीवी चैनल पर वे दृश्य देखे, जिन्हें देखकर 6 दिसंबर 1992 को आपकी आंखों में आंसू आ गए? उस दिन कार सेवक सुबह 11:30 बजे उस जगह पर पहुंचे थे, और शाम 5:00 बजे जब यह खबर आई कि ढांचा पूरी तरह से गिरा दिया गया है, तब कल्याण सिंह Government ने इस्तीफा दे दिया. बाद में, रात 8:45 बजे, तत्कालीन Prime Minister नरसिम्हा राव ने समाचार प्रसारण के बीच में आकर उर्दू में घोषणा की कि उत्तर प्रदेश Government को बर्खास्त कर दिया गया है. स्वर्गीय राजीव गांधी ने 1989 में अयोध्या से भगवान राम का नाम लेकर अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की थी, और आज सोनिया गांधी बाबरी का नाम लेकर गाजा को लेकर दुख जताते हुए बटाला हाउस एनकाउंटर के आरोपियों के लिए आंसू बहाती हैं. इससे कांग्रेस की असली और छिपी हुई मानसिकता का पता चलता है. यह न केवल मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी है, बल्कि विशेष रूप से कट्टरपंथी तत्वों के साथ जुड़ी हुई है. सोनिया गांधी की आंखों में आंसू और कितनी चीजों के लिए आए थे.
Samajwadi Party के प्रमुख अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी के एक नेता ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व Chief Minister रामलला के दर्शन करने आएंगे. ऐसा लगता है कि जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, वे इस तरह के दिखावे और ज्यादा करेंगे. जरा उन लोगों के बारे में सोचिए जिन्होंने गोली चलवाने का आदेश दिया था, जिनके नेताओं ने कहा था कि जो लोग गुंबदों पर चढ़े थे, वे बस वहीं फंस गए थे, और उनके पिता, मुलायम सिंह, जिन्होंने एक बार कहा था, ‘मैंने 16 हिंदुओं को मरवा दिया, मैं और क्या कर सकता था?’ अगर आज वे मंदिर आ रहे हैं तो यह साफ है कि कोई ऐसी ताकत है, हिंदू एकता की ताकत जिसने उन्हें यहां आने के लिए मजबूर किया है. पहले तो यह देखना होगा कि क्या वे सच में आते हैं, लेकिन अगर वे आते भी हैं सिर्फ एक ‘चुनावी हिंदू’ के रूप में तो मैं हिंदू समाज से कहूंगा कि आपने कुछ हद तक एकता दिखाई है, और अब जो लोग कभी गोली चलवाने का आदेश देते थे, वे पूजा-पाठ करने की बात कर रहे हैं. थोड़ी और एकता दिखाइए, तो वे ‘जय श्रीराम’ का नारा भी लगाने लगेंगे खासकर तब, जब दिल्ली में Prime Minister मोदी और Lucknow में Chief Minister योगी हैं.
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डीकेएम/डीकेपी
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