कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला से मरने वालों की संख्या 4 हजार के पार

किंशासा, 2 अक्टूबर . कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में जारी इबोला प्रकोप से मरने वालों की संख्या 4 हजार के पार पहुंच गई है. कांगो के स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से Friday को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सात प्रांतों में इबोला के 8,300 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें 4,018 लोगों की मौत हो चुकी है.

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों में बताया गया है कि अब तक 2,162 मरीज ठीक हो चुके हैं. वहीं, इबोला से मृत्यु दर 48.4 प्रतिशत है.

अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संगठन मेडेसिन्स सान्स फ्रंटियर्स (एमएसएफ) ने Thursday को चेतावनी दी कि इस प्रकोप से वास्तव में प्रभावित होने और जान गंवाने वाले लोगों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से ज्यादा हो सकती है.

संगठन ने कहा कि निगरानी और मामलों की पहचान में कमियों के कारण वास्तविक आंकड़ा अधिक होने की आशंका है.

यह डीआरसी के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन गया है. वहीं, दुनियाभर में यह वर्ष 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैले इबोला प्रकोप के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप है.

इस बीच, अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) ने Thursday को चेतावनी दी कि डीआरसी में हाल में इबोला के दर्ज मामलों में आई कमी को संक्रमण में लगातार गिरावट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

अफ्रीका सीडीसी ने कहा कि मामलों में कमी बीमारी की निगरानी व्यवस्था में आई रुकावटों के कारण भी हो सकती है.

ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में अफ्रीका सीडीसी के अधिकारी वेसम मनकौला ने बताया कि मई के मध्य में इबोला का प्रकोप केवल तीन स्वास्थ्य क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब यह सात प्रांतों के 63 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुका है. इनमें से 45 स्वास्थ्य क्षेत्रों में अब भी संक्रमण फैल रहा है.

उन्होंने बताया कि पिछले चार से पांच सप्ताह में महामारी के मामलों का ग्राफ काफी हद तक स्थिर रहा है. ताजा सप्ताह में दर्ज मामलों में कमी भी आई है, लेकिन एजेंसी ने इसे बीमारी पर लगातार नियंत्रण मिलने का संकेत मानने से सावधान किया है.

मनकौला ने कहा, ”मामलों के ग्राफ में गिरावट का यह मतलब नहीं है कि प्रकोप पूरी तरह नियंत्रण में आ गया है. कई इलाकों में असुरक्षा और स्थानीय समुदायों के विरोध के कारण बीमारी की निगरानी और इससे निपटने की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. इससे चिंता बढ़ गई है कि संक्रमण के कुछ मामलों की पहचान नहीं हो पा रही होगी.”

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एएमटी/