कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप काबू में, खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं : डीआरसी

किंशासा, 13 सितंबर . डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) Government के अनुसार, देश में फैला इबोला प्रकोप अब नियंत्रण में है और यह अपने चरम स्तर को पार कर चुका है. हालांकि, स्थानीय स्तर पर अचानक सामने आ रहे नए मामलों, संक्रमण के निरंतर प्रसार और इसके सातवें प्रांत तक पहुंचने के कारण अभी भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है.

Government के प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने Friday को कैबिनेट बैठक की रिपोर्ट पढ़ते हुए स्वास्थ्य मंत्री रोजर कंबा का हवाला देते हुए कहा, “इबोला का 17वां प्रकोप काबू में है और अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह की शुरुआत में यह अपने चरम पर पहुंच गया था.”

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, Government का कहना है कि सभी मुख्य संकेत मामले घटने की ओर इशारा कर रहे हैं. प्रकोप के हालिया विस्तार से पहले प्रभावित 10 स्वास्थ्य क्षेत्रों में कम से कम 21 दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है, जबकि प्रकोप के केंद्र पूर्वी प्रांत इटुरी के कई इलाकों में संक्रमण की रफ्तार धीमी हुई है.

इसके बावजूद, अधिकारियों ने लगातार सतर्कता बरतने और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने) को सख्ती से करने को कहा है. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में हाल ही में मामले बढ़े हैं, वहां कड़ी निगरानी जरूरी है.

कांगो के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और मौजूदा सांसद जीन-जैक्स मबुंगानी मबांडा ने इस आकलन को लेकर सावधानी बरतने की अपील की. ​​उन्होंने Saturday को कहा कि कुछ इलाकों में मामलों में कमी का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि हर जगह संक्रमण पर काबू पा लिया गया है.

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकोप में, जहां संक्रमण कई जगहों से फैल रहा हो, अलग-अलग इलाके अलग-अलग समय पर अपने चरम पर पहुंच सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि महामारी का ग्राफ (एपिडेमिक कर्व) केवल पहचाने गए मामलों को दिखाता है और समुदायों में मौजूद उन संक्रमणों से प्रभावित हो सकता है जिनकी पहचान नहीं हो पाई है.

Tuesday को अपनी नवीनतम साप्ताहिक रिपोर्ट में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि प्रकोप “अभी भी अनियंत्रित और अलग-अलग तरह का (हेटरोजीनस) बना हुआ है.” कुछ इलाकों में संक्रमण कम हो रहा है, जबकि अन्य जगहों पर यह बढ़ रहा है या भौगोलिक रूप से फैल रहा है.

संगठन ने कहा, “यह प्रकोप एक समान रूप से घटने के बजाय भौगोलिक रूप से अलग-अलग तरह का व्यवहार दिखा रहा है.”

डीआरसी Government ने Thursday को उत्तर-पश्चिमी प्रांत सुद-उबांगी में इबोला के पहले मामले की पुष्टि की, जिससे यह प्रभावित होने वाला सातवां प्रांत बन गया है. सुद-उबांगी की सीमा उन छह प्रांतों में से किसी से भी नहीं लगती है जहां पहले इबोला के मामलों की पुष्टि हुई थी. मबांडा के अनुसार, जिस 23 साल के मरीज़ की बाद में मौत हो गई, उसने सुद-उबांगी पहुंचने से पहले काफी यात्रा की थी. उसने कई प्रांतों और पड़ोसी देशों रवांडा और युगांडा की यात्रा की थी, जिसमें सड़क और नदी दोनों रास्ते शामिल थे.

10 सितंबर तक, डीआरसी में इबोला के 7,022 कन्फर्म मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 3,398 मौतें शामिल थीं और मृत्यु दर 48.4 प्रतिशत थी. यह बीमारी अब सात प्रांतों के 62 हेल्थ जोन में फैल चुकी है.

मई में घोषित यह मौजूदा प्रकोप डीआरसी के इतिहास में इबोला की सबसे बड़ी और सबसे घातक महामारी बन गया है. साथ ही, यह दुनिया भर में दूसरी सबसे बड़ी महामारी है; इससे बड़ी महामारी 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में फैली थी.

पीआईएम/एएस