
Bengaluru, 17 सितंबर . कर्नाटक के उपChief Minister और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने Thursday को बताया कि राज्य में सूखे के आकलन के दूसरे चरण में 23 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जिससे राज्य में सूखा प्रभावित तालुकों की कुल संख्या 124 हो गई है.
उपChief Minister परमेश्वर ने कहा कि Government वैज्ञानिक तरीकों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की कम बारिश के कारण पैदा हुए सूखे के हालात का लगातार आकलन कर रही है और किसानों की मुश्किलों को दूर करने के लिए चरणबद्ध तरीके से कदम उठा रही है.
पहले चरण में Government ने 102 तालुकों में जमीनी स्तर पर जांच की और 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया, जिनमें 89 गंभीर रूप से सूखाग्रस्त और 12 मध्यम रूप से सूखाग्रस्त तालुक शामिल हैं.
दूसरे चरण में अब 23 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. इनमें से 21 को गंभीर रूप से सूखाग्रस्त और दो को मध्यम रूप से सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है.
गंभीर रूप से सूखाग्रस्त तालुकों में टिपटूर, करातगी, मानवी, सिंदहनूर, सिरवार, अफजलपुर, अलंद, चित्तापुर, कलबुर्गी, यादरामी, शाहबाद, भालकी, बसवनबागेवाड़ी, बबलेश्वर, टिकोटा, रट्टीहल्ली, हुबली, नवलगुंड, हुबली शहर, अन्नगिरी और कदुर शामिल हैं.
पोन्नामपेट और विराजपेट को मध्यम रूप से सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है.
उपChief Minister परमेश्वर ने कहा कि 1 जून से 16 सितंबर के बीच हुई बारिश, मिट्टी की नमी, फसल की स्थिति और अन्य वैज्ञानिक पैमानों के आधार पर जमीनी सच्चाई की जांच (ग्राउंड-ट्रूथिंग) के तीसरे चरण के लिए 17 जिलों के 53 तालुकों को चुना गया है.
Government यह पक्का करने के लिए ‘क्रॉप लॉस जीटी’ मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रही है कि आकलन सटीक और पारदर्शी हो. इस ऐप के जरिए मौके पर ही जियो-टैग की गई तस्वीरें, जीपीएस जानकारी, कृषि भूमि का विवरण और फसल के नुकसान का ब्यौरा दर्ज किया जाएगा.
अधिकारियों की टीमें 19 और 20 सितंबर को चुने गए गांवों के खेतों का दौरा करेंगी और फसल के नुकसान का सीधा आकलन करेंगी. डिप्टी कमिश्नरों और संबंधित अधिकारियों को 21 सितंबर तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.
उपChief Minister परमेश्वर ने कहा, “किसानों की मुश्किलों की असल स्थिति Government के संज्ञान में आनी चाहिए. हमारा मकसद यह पक्का करना है कि फसल के वास्तविक नुकसान के दस्तावेजीकरण से कोई भी किसान न छूटे.”
उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई वैज्ञानिक आकलन, पारदर्शी सर्वे और सटीक रिपोर्ट पर आधारित होगी. उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के खत्म होने तक सूखे की स्थिति पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर जमीनी स्तर पर जांच (ग्राउंड-ट्रूथिंग) के अगले दौर में और तालुकाओं को शामिल किया जाएगा.
उपChief Minister परमेश्वर ने कहा कि किसानों की मुश्किलों का समाधान करना Government की पहली प्राथमिकता है. उन्होंने यह भी कहा कि Government फसल के नुकसान के वास्तविक स्तर के आधार पर नियमों के मुताबिक जरूरी मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है.
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एससीएच/डीकेपी
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