
Bengaluru, 29 अगस्त . कर्नाटक के उपChief Minister और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने Saturday को कहा कि राज्य Government अगस्त के आखिर या सितंबर के पहले हफ्ते तक सूखे से राहत की मांग करते हुए केंद्र को एक ज्ञापन सौंपेगी.
मैसूर में मीडिया से बात करते हुए परमेश्वर ने कहा कि Government ने 101 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया है और अगले 15 दिनों तक स्थिति का आकलन करती रहेगी. आकलन के आधार पर सूखा-प्रभावित सूची में और भी तालुक जोड़े जा सकते हैं.
उन्होंने कहा, “हम इस महीने के आखिर तक या सितंबर के पहले हफ्ते में केंद्र को सूखे से जुड़ा ज्ञापन सौंपेंगे. फसलों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है और उसी के आधार पर ज्ञापन तैयार किया जाएगा. इसके बाद केंद्रीय टीमें राज्य का दौरा करके सर्वे करेंगी और फिर सूखे से राहत के लिए मदद जारी की जाएगी.”
परमेश्वर ने कहा, “हम किसानों को प्रति एकड़ दिए जाने वाले मुआवजे पर फैसला करेंगे. पीने का पानी, पशुओं के लिए चारा और पलायन रोकने के लिए काम करना हमारी पहली प्राथमिकताएं हैं. हमने इस दिशा में पहले ही कदम उठा लिए हैं.”
2023 में कर्नाटक में पड़े सूखे को याद करते हुए परमेश्वर ने कहा कि राज्य को अनुमानित 39,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और उसने राहत के तौर पर 18,000 करोड़ रुपये की मांग का प्रस्ताव भेजा था.
उन्होंने कहा, “हम दिल्ली गए और विरोध प्रदर्शन किया. Supreme Court के निर्देशों के बाद 3,500 करोड़ रुपये जारी किए गए. इस बार ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए.”
परमेश्वर ने कहा कि उन्होंने केंद्र से पहले जैसा अनुभव न दोहराने को सुनिश्चित करने की अपील की है और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के तहत तुरंत फंड जारी करने की मांग की है.
उन्होंने कहा कि केंद्र ने एसडीआरएफ के तहत 1,200 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है और उन्होंने केंद्र से यह रकम तुरंत जारी करने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा, “अगर 1,200 करोड़ रुपये जारी किए जाते हैं, तो इससे हमें किसानों को मुआवजा देने में मदद मिलेगी. हम एक हफ्ते या 10 दिनों के भीतर किसानों को यह पैसा बांट देंगे. एसडीआरएफ में राज्य और केंद्र के बीच 25:75 के अनुपात में योगदान दिया जाएगा.
बी. नागेंद्र के इस्तीफे से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए परमेश्वर ने कहा, “नागेंद्र ने कोई अपराध नहीं किया है. फिर भी, भाजपा ने उनके इस्तीफे की मांग करके इस मुद्दे को Political रंग दे दिया. पार्टी के एक अनुशासित सिपाही के तौर पर नागेंद्र ने इस्तीफा दे दिया ताकि Government को शर्मिंदा न होना पड़े. उन्हें इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं थी.”
उन्होंने दावा किया कि सीबीआई या ईडी की चार्जशीट में नागेंद्र का नाम शामिल नहीं था.
उन्होंने कहा, “मैं गृह मंत्री था, इसलिए मुझे इस बारे में जानकारी है. उन्होंने बेवजह इस मुद्दे का Politicalरण किया और उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया. हम आने वाले दिनों में लोगों को सच्चाई बताएंगे.”
परमेश्वर ने कहा, “हमने विपक्ष से कहा था कि वे सदन में कानूनी तरीके से सवाल उठाएं और हम उनके जवाब देंगे. अगर उनके पास दस्तावेज हैं, तो वे उन्हें विधानसभा के सामने रखें. हम उनका जवाब देने में सक्षम हैं. उनके पास कोई दस्तावेज नहीं था और उन्होंने बस इस मुद्दे का Politicalरण किया.”
जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व Chief Minister सिद्दारमैया हाल की घटनाओं पर चुप रहे हैं, तो परमेश्वर ने इस बात को खारिज कर दिया.
उन्होंने कहा, “वे चुप कहां हैं? वे विधानसभा आए थे और सदन में मौजूद थे. वे एक-दो महीने आराम करेंगे और फिर अपनी गतिविधियां शुरू करेंगे.”
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ओपी/एएस
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