
कोप्पल, 8 अक्टूबर . कर्नाटक के उपChief Minister जी. परमेश्वर ने Thursday को कहा कि प्रदेश ने केंद्र से सूखे से निपटने के लिए 10,000 करोड़ रुपए से 12,000 करोड़ रुपए की मदद मांगी है, जबकि राज्य Government ने सूखे से प्रभावित लगभग 50 लाख किसानों को पहली किश्त के तौर पर 2,500 रुपए जारी किए हैं.
परमेश्वर ने येल्बुर्गा तालुक के गुन्नल गांव में सूखे से प्रभावित खेतों का जायजा लेने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और उन्होंने भरोसा दिलाया कि Government किसानों को अकेला नहीं छोड़ेगी. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो Government किसानों की मदद के लिए कर्ज लेने को भी तैयार है.
कर्नाटक के 240 तालुकों में से 217 को पहले ही सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है. डिप्टी सीएम परमेश्वर ने कहा कि उत्तरी कर्नाटक के कई जिलों में स्थिति मैसूर क्षेत्र की तुलना में अधिक गंभीर है. इनमें बल्लारी, विजयनगर, कोप्पल, रायचूर और विjaipurा शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि विjaipurा और बल्लारी में सूखे से प्रभावित इलाकों के हालिया दौरों के दौरान यह पाया गया कि विजयनगर जिले में लगभग 98 प्रतिशत फसलें बर्बाद हो गई हैं, और बची हुई फसलों से भी किसानों को अच्छी पैदावार मिलने की संभावना कम है.
उन्होंने कहा कि किसान अक्सर अपनी आजीविका चलाने के लिए बैंकों, प्राइवेट उधार देने वालों और जान-पहचान वालों से पैसे उधार लेकर दो या तीन एकड़ जमीन पर खेती करते हैं. फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाने के कारण, अब वे अपना कर्ज चुकाने और अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
डिप्टी सीएम परमेश्वर ने कहा, “किसान ऐसी स्थिति में हैं जहां वे बेबस हो गए हैं. जब हम उनकी शिकायतें सुनते हैं, तो हमें उनके दर्द की गहराई का एहसास होता है.”
उन्होंने कहा कि Government सूखे से निपटने के लिए पीने के पानी की सप्लाई, किसानों की मदद और मजदूरी वाले रोजगार पैदा करने पर ध्यान दे रही है. उन्होंने बताया कि कई गांवों में सूखे की वजह से पलायन शुरू हो चुका है.
लंबानी टांडा का जिक्र करते हुए, जहां के लोग काम की तलाश में पलायन करने की तैयारी कर रहे थे, डिप्टी सीएम परमेश्वर ने कहा कि अधिकारियों को ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.
उन्होंने कहा, “अगर ग्रामीण इलाकों में काम मिले तो पलायन को रोका जा सकता है. हम तभी बच सकते हैं जब किसान बचेंगे. किसानों के बिना न तो समाज और न ही Government टिक सकती है.”
केंद्र के नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एनडीआरएफ) के नियमों के तहत, किसान कुल 8,500 रुपए की राहत पाने के हकदार हैं, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा शामिल है. हालांकि, केंद्र ने अभी तक अपना हिस्सा जारी नहीं किया है, इसलिए राज्य Government ने पहली किस्त के तौर पर अपने फंड से 2,500 रुपए जारी करने का फैसला किया.
Government पहले ही 50 लाख किसानों को मदद देने के लिए लगभग 1,250 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है. परमेश्वर ने माना कि नुकसान को देखते हुए 2,500 रुपए की रकम कम है, लेकिन उन्होंने कहा कि Government की जिम्मेदारी है कि वह तुरंत मदद पहुंचाए.
राज्य ने 177 तालुकों में हुए नुकसान के आधार पर फसल के नुकसान का आकलन लगभग 46,000 करोड़ रुपए बताया है. अगर सूखा जारी रहता है तो नुकसान और बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि मौजूदा आकलन और एनडीआरएफ नियमों के आधार पर, कर्नाटक ने केंद्र से 10,000 करोड़ से 12,000 करोड़ रुपए की मांग की है.
सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए तीन केंद्रीय टीमों ने कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया है और राज्य को उम्मीद है कि उनकी रिपोर्ट के आधार पर राहत राशि जारी की जाएगी.
डिप्टी सीएम परमेश्वर ने कहा कि Chief Minister डीके शिवकुमार, खुद और विपक्ष के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल की केंद्र से मिलकर और अधिक मदद मांगने की योजना थी. हालांकि, उन्होंने कहा कि भाजपा और जेडी(एस) नेताओं ने संकेत दिया था कि वे प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होंगे.
उन्होंने कहा कि नुकसान का अंतिम आकलन काफी बढ़ सकता है और अगर नुकसान लगभग 60,000 करोड़ रुपए तक पहुंचता है, तो राज्य 18,000 करोड़ रुपए से 20,000 करोड़ रुपए की राहत राशि की मांग कर सकता है.
उन्होंने कहा, “यह राजनीति का समय नहीं है; यह किसानों के साथ खड़े होने का समय है. कर्नाटक के सांसदों को पार्टी से ऊपर उठकर केंद्र पर दबाव बनाना चाहिए.”
डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि यह पक्का करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं कि फसल बीमा का मुआवजा किसानों तक जल्द से जल्द पहुंचे. उन्होंने कहा कि पेंडिंग क्लेम को लेकर बीमा कंपनियों के साथ बातचीत हुई है और Government फसल बीमा प्रीमियम में किसानों के हिस्से से जुड़े मुद्दों पर भी विचार कर रही है.
परमेश्वर ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में ग्राउंडवाटर का लेवल तेजी से गिरा है, और कुछ इलाकों में तो 500 फीट तक ड्रिलिंग करने के बाद भी पानी नहीं मिला. उन्होंने बताया कि उनके इलाके में ऐसी जगहें भी हैं जहां 1,800 फीट तक ड्रिलिंग करने के बाद भी पानी नहीं मिला.
Government ने सूखे से प्रभावित किसानों को लोन चुकाने के लिए पांच साल का समय देने के उपाय भी शुरू किए हैं. 60 महीने की मोहलत दी गई है, जिसके दौरान किसानों को अपना लोन नहीं चुकाना होगा. उन्होंने कहा कि बैंकों को इन उपायों के बारे में जानकारी दे दी गई है, जिसमें ब्याज की देनदारी से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि किसानों को डीजल सब्सिडी, बिजली सब्सिडी और Government की गारंटी स्कीमों के जरिए भी मदद मिल रही है.
उन्होंने कहा, “अगर अभी दी जा रही मदद कम पड़ती है तो और कदम उठाए जाएंगे. हम किसी भी हाल में किसानों का साथ नहीं छोड़ेंगे. जरूरत पड़ने पर Government राहत देने के लिए कर्ज लेने को भी तैयार है.”
मक्के की कीमतों पर परमेश्वर ने कहा कि केंद्र Government से दखल देने का अनुरोध किया जाएगा, क्योंकि उत्तरी कर्नाटक के कई जिलों में किसान कम कीमतों और कम पैदावार की वजह से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करना केंद्र Government की जिम्मेदारी है.
राज्य के कुछ ट्रांसपोर्ट डिपो में डीजल की कमी की खबरों पर उन्होंने कहा कि बस सेवाओं में किसी भी तरह की रुकावट को तुरंत ठीक किया जाएगा और इसे एक अस्थायी समस्या बताया.
परमेश्वर ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि गारंटी योजनाओं की वजह से कर्नाटक में आर्थिक संकट पैदा हुआ है. उन्होंने कहा कि Government ने पिछले तीन सालों में इन योजनाओं पर लगभग 52,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं और उन्हें लागू करना जारी रखा है.
उन्होंने कहा कि राज्य वित्तीय अनुशासन बनाए हुए है और गारंटी योजनाओं के कारण किसी भी सरकारी कार्यक्रम को रोका नहीं गया है.
उन्होंने कहा कि Government फसल के नुकसान का मुआवजा, फसल बीमा सहायता और लोन चुकाने की बढ़ी हुई सुविधाएं जैसे उपाय जारी रखेगी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सूखे के दौरान किसानों की आजीविका प्राथमिकता बनी रहेगी.
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एएसएच/डीकेपी
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