
Bengaluru, 21 सितंबर . जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने Monday को आरोप लगाया कि गडग से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एच.के. पाटिल द्वारा राज्य में गंभीर सूखे की स्थिति को लेकर उठाई गई चिंताओं ने कांग्रेस Government की निष्क्रियता को उजागर कर दिया है. जेडीएस ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि एच.के. पाटिल के पत्र से स्पष्ट होता है कि सरकारी मशीनरी किसानों की समस्याओं के प्रति पर्याप्त रूप से संवेदनशील नहीं है.
पार्टी ने आरोप लगाया कि पाटिल ने शिकायत की है कि अधिकारी Chief Minister के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं. जेडीएस ने सवाल उठाया कि Chief Minister डी.के. शिवकुमार Government चला रहे हैं या फिर वातानुकूलित दफ्तरों में बैठे अधिकारी फैसले ले रहे हैं.
जेडीएस ने सूखे के आकलन पर भी सवाल उठाए. पार्टी का आरोप है कि 40 से 60 प्रतिशत तक वर्षा की कमी झेल रहे कई तालुकों को अब तक सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है. पर्याप्त बारिश नहीं हुई है और वर्षा की कमी 40 से 60 प्रतिशत के बीच है, फिर भी अधिकारी मानो यह सपना देख रहे हैं कि 27 तालुकों के किसान समृद्ध हैं.”
जेडीएस ने Government पर Bengaluru-केंद्रित प्रशासन चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर कर्नाटक के किसानों का भविष्य एयर कंडीशनर वाले कमरों में बैठे अधिकारी तय कर रहे हैं.
पार्टी ने डिजिटल युग में प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. जेडीएस का दावा है कि सरकारी पत्राचार को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कई दिन लग रहे हैं. पार्टी ने तंज कसते हुए पूछा, “क्या यह आईटी-बीटी राज्य है या फिर पाषाण युग का प्रशासन?”
जेडीएस ने कहा कि स्वयं एच.के. पाटिल ने अपने पत्र में लिखा है कि अधिकारी Government की छवि खराब कर रहे हैं. पार्टी ने पूछा कि जब सत्तारूढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक ही ऐसी बात कह रहे हैं तो प्रशासन की स्थिति पर और क्या कहा जा सकता है.
पार्टी ने Government से मांग की कि पाटिल द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए.
पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल ने चेतावनी दी है कि Government सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सही पहचान और वर्गीकरण करने में विफल रही है. यदि उनके निर्वाचन क्षेत्र गडग के तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया, तो वे विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने Government से सूखा घोषित करने के दिशा-निर्देशों पर पुनर्विचार करने की भी अपील की है.
Chief Minister डी.के. शिवकुमार को लिखे पत्र में पाटिल ने यह भी कहा कि सांख्यिकी विभाग के अधिकारी फसल बीमा से जुड़े मामलों में उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं.
उन्होंने लिखा, “सच का सम्मान नहीं किया जा रहा है. अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार तथ्यों को तोड़ मरोड़ रहे हैं. उन्होंने दिशा-निर्देशों और Chief Minister डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए फैसलों के विपरीत निर्णय किए हैं.”
पाटिल ने कहा, “किसान विरोधी यह रवैया Government की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र के 73 तालुकों में से 27 को अब तक सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है.”
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