
मांड्या, 23 अगस्त . केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने Sunday को कर्नाटक की कांग्रेस Government पर निशाना साधते हुए कहा कि वह जेडी(एस) कार्यकर्ताओं को एनआईसीई परियोजना के खिलाफ भड़का नहीं रहे हैं, बल्कि पूरे राज्य के लोगों को इस कथित बड़े घोटाले के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए.
मेलुकोटे स्थित श्री चेलुवनारायण स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पत्रकारों से बातचीत में कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि Bengaluru-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (एनआईसीई) परियोजना कर्नाटक के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और राज्य Government को इस पूरी परियोजना का अधिग्रहण कर लेना चाहिए.
उन्होंने कहा कि एनआईसीई कंपनी कथित तौर पर नियमों के विरुद्ध टोल वसूली कर रही है और मनमाने ढंग से टोल दरों में बढ़ोतरी कर रही है. हालांकि कांग्रेस Government और एनआईसीई कंपनी के अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है.
कुमारस्वामी ने कहा कि Sunday को अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच की टिप्पणियों पर आधारित है, न कि मनगढ़ंत.
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा और पूर्ववर्ती Governmentों तथा अधिकारियों ने कंपनी के साथ मिलीभगत कर किसानों की जमीन लुटवाई. उनका दावा है कि 20 साल बीतने के बाद भी किसानों को पूरा मुआवजा नहीं मिला और अधिग्रहित जमीन का इस्तेमाल रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए किया गया.
Union Minister ने लोक निर्माण विभाग मंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि एनआईसीई के साथ समझौते की अवधि अभी 20 साल और बाकी है. उन्होंने पूछा कि Government किस समझौते की बात कर रही है और क्या वह कंपनी को अगले 20 साल तक कथित लूट की छूट देना चाहती है.
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि Government जनता की नहीं, बल्कि एक निजी कंपनी के हितों की रक्षा कर रही है. उन्होंने यह भी दावा किया कि Chief Minister और कुछ मंत्रियों के कंपनी के साथ कारोबारी संबंध हैं.
एनआईसीई परियोजना के प्रमोटर अशोक खेनी की ओर से कथित तौर पर दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि उनका निशाना खेनी नहीं, बल्कि राज्य Government है. उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश Government के खिलाफ है, खेनी के खिलाफ नहीं.
टोल भुगतान को लेकर लोगों को उकसाने के आरोपों को भी कुमारस्वामी ने खारिज किया. उन्होंने कहा कि वह किसी को उकसा नहीं रहे हैं, लेकिन अब तक जनता को इस कथित अनियमितता के खिलाफ खड़ा हो जाना चाहिए था.
कुमारस्वामी ने दावा किया कि उन्होंने 2006-07 में विधानसभा में भी एनआईसीई परियोजना का मुद्दा उठाया था और परियोजना रद्द करने का सुझाव दिया था, लेकिन उस समय उन्हें केवल 38 विधायकों का समर्थन मिला था.
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डीएससी
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