
मंगलुरु, 18 सितंबर . कर्नाटक Government ने Friday को तुलु को कन्नड़ के साथ राज्य की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा घोषित किया. दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम बदलकर मंगलुरु जिला करने की प्रक्रिया शुरू की और तटीय क्षेत्र के लिए 32,611 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी.
मंगलुरु में आयोजित एक विशेष ऐतिहासिक बैठक में मंत्रिमंडल ने ये निर्णय लिए.
कैबिनेट सहयोगियों के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए Chief Minister डीके शिवकुमार ने कहा कि मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से दक्षिण कन्नड़ (मंगलुरु) और उडुपी जिलों में तुलु को अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा के रूप में मान्यता देने का निर्णय लिया है.
उन्होंने बताया कि यह निर्णय तुलु भाषी लोगों, संगठनों और जन प्रतिनिधियों की भाषा को आधिकारिक मान्यता देने की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद लिया गया है.
शिवकुमार ने कहा कि तटीय जिलों में तुलु भाषा प्रमुखता से बोली जाती है. पिछली Government ने यह निर्णय क्यों नहीं लिया, इस पर हम चर्चा नहीं करेंगे. हम भावनाओं पर आधारित राजनीति नहीं करेंगे. उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि Government भावनात्मक राजनीति में लिप्त होने के बजाय लोगों की सामाजिक और आर्थिक शक्ति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज का निर्माण केवल भावनाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता, और Government लोगों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो मंत्रिमंडल आर्थिक और कानूनी ढांचे पर विचार करेगा और आने वाले दिनों में ध्यान देने योग्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बैठकें करेगा.
शिवकुमार ने कहा कि यह कर्नाटक टीम है. मंत्रिमंडल आपके साथ है. उन्होंने घोषणा की कि तुलु को राज्य की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा घोषित किया जाएगा, जो उडुपी और दक्षिण कन्नड़ (मंगलुरु) जिलों तक सीमित होगी.
Chief Minister ने याद दिलाया कि पूर्व मंत्री रामनाथ राय ने तुलु को दूसरी अतिरिक्त भाषा घोषित करने की मांग सबसे पहले उठाई थी.
उन्होंने कहा कि विधायक अशोक कुमार राय और कई अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों ने मिलकर इस मांग के लिए दबाव बनाया था. शिवकुमार ने तुलु को मान्यता दिलाने के लिए काम करने वाले सभी लोगों को बधाई दी.
क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को समझाते हुए शिवकुमार ने कहा कि पुत्तूर विधायक अशोक कुमार राय ने विधायक बनने के बाद विधानसभा में जो पहला सवाल उठाया था, वह तुलु भाषा से संबंधित था.
उन्होंने कहा कि मुझे आश्चर्य हुआ. उनकी पहली प्राथमिकता भाषा थी. आज उन्होंने 500 करोड़ रुपए के मेडिकल कॉलेज के लिए मंजूरी हासिल कर ली है, लेकिन यह एक अलग बात है.
कैबिनेट ने दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम बदलकर मंगलुरु जिला करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्णय लिया. शिवकुमार ने कहा कि Government एक मसौदा अधिसूचना जारी करेगी और अंतिम निर्णय लेने से पहले एक महीने तक जनता की राय और आपत्तियां आमंत्रित करेगी.
उन्होंने कहा कि लोग मंगलुरु को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानते हैं. लोगों ने इस संबंध में अपनी इच्छा व्यक्त की है. हमें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और जनता की राय लेनी होगी.
तटीय विकास पर, शिवकुमार ने कहा कि कैबिनेट ने 32,611 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसमें ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए 16,000 करोड़ रुपए शामिल हैं. कैबिनेट ने तटीय क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन केंद्र में बदलने के लिए मंगलुरु, उडुपी और कारवार जिलों के 12 द्वीपों के विकास को भी मंजूरी दी.
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एमएस/
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