कर्नाटक : आंतरिक आरक्षण लागू करने को लेकर बीजेपी का सिद्धारमैया पर हमला, ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाने का आरोप

Bengaluru, 28 अगस्त . BJP MP गोविंद करजोल ने Friday को पूर्व Chief Minister और कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य सिद्धारमैया पर आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया सत्ता से बाहर होने पर पिछड़े और वंचित वर्गों के लिए मगरमच्छ के आंसू बहाते हैं, लेकिन आंतरिक आरक्षण लागू करने के प्रति उनकी कोई वास्तविक प्रतिबद्धता नहीं है.

Bengaluru स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय जगन्नाथ भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए करजोल ने कहा कि सिद्धारमैया अब दावा कर रहे हैं कि वह मौजूदा व्यवस्था में हुई कथित विसंगतियों को दूर करने के लिए Chief Minister डीके शिवकुमार से बात करेंगे और आंतरिक आरक्षण लागू करवाएंगे.

करजोल ने सवाल उठाया कि जब सिद्धारमैया पहले दो बार Chief Minister रह चुके हैं, तब उन्होंने आंतरिक आरक्षण लागू क्यों नहीं किया?

उन्होंने कहा, “आंतरिक आरक्षण के लिए संघर्ष का इतिहास 30 साल पुराना है. सिद्धारमैया अब कह रहे हैं कि इसमें अन्याय हुआ है और वह Chief Minister डीके शिवकुमार से बात कर इसे लागू करवाएंगे. लेकिन जब वह पहले दो बार Chief Minister थे, तब उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया?”

करजोल ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया को इस्तीफा देने से एक दिन पहले मधुसूदन नाइक रिपोर्ट मिल गई थी. 18 बजट पेश कर चुके सिद्धारमैया राज्य की वित्तीय स्थिति से अच्छी तरह परिचित थे और जानते थे कि Government के पास आरक्षण लागू करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है.

BJP MP ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने मुद्दे पर भ्रम पैदा किया, मामले को अदालत तक पहुंचने दिया और सड़क पर विरोध-प्रदर्शन को बढ़ावा दिया, जिसके बाद वह Political दबाव से बच निकले.

करजोल ने पिछली Government की भी आलोचना करते हुए कहा कि उसने बेलगावी सत्र के दौरान 56 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखने वाला विधेयक पारित कर Governor को भेजा, लेकिन उसे लागू कराने में विफल रही.

उन्होंने सिद्धारमैया पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह दावा कर रहे हैं कि जी. परमेश्वर को उपChief Minister बनाने में उनकी भूमिका थी. Chief Minister रहते हुए सिद्धारमैया ने परमेश्वर की ज्यादा परवाह नहीं की और उन्हें इसलिए किनारे लगाया गया क्योंकि वह उन्हें Chief Minister पद का संभावित दावेदार मानते थे.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सतीश जारकीहोली, एमबी पाटिल और जमीर अहमद जैसे नेताओं के साथ भी निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया जा रहा है. सत्ता खोने के बाद सिद्धारमैया राज्य में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. सिद्धारमैया अन्य नेताओं को Chief Minister बनने से रोकना चाहते हैं, जबकि अपने बेटे के लिए Political भूमिका सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं.

भाजपा नेता ने पिछड़ा वर्ग और आरक्षण से जुड़ी विभिन्न रिपोर्टों के प्रबंधन को लेकर भी सिद्धारमैया को घेरा. उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने कंथराज आयोग रिपोर्ट और जयप्रकाश हेगड़े रिपोर्ट को नजरअंदाज किया, जबकि मधुसूदन नाइक रिपोर्ट का Political हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की.

करजोल ने यह भी आरोप लगाया कि सदाशिव आयोग रिपोर्ट की अनदेखी की गई और Government ने नागमोहन दास तथा मधुस्वामी से जुड़ी रिपोर्टों को न तो प्राप्त किया और न ही लागू किया.

वाल्मीकि निगम मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए करजोल ने कहा कि केवल पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे राज्य मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना चाहिए था.

एएमटी/एबीएम