
Lucknow, 26 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश के Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश का नाम सुनकर उद्योगपति यहां आने से कतराते थे. निवेशकों को Lucknow बुलाना तक मुश्किल था. हालत यह थी कि वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश के लिए आयोजित होने वाली इन्वेस्टर्स समिट दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में करानी पड़ी थी. निवेश यूपी में होना था, लेकिन निवेशकों को बुलाने के लिए दिल्ली का सहारा लेना पड़ा.
सीएम योगी ने Monday को राजधानी में आयोजित जीसीसी इनोवेशन समिट-2026 में प्रदेश के उस दौर को याद करते हुए कहा कि आज तस्वीर बदल चुकी है. उत्तर प्रदेश में 50 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं. इनमें 15 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि साढ़े सात लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं.
Lucknow के द सेंट्रम में आयोजित समिट में सीएम योगी ने कहा कि दस साल पहले कोई कहता कि Lucknow में जीसीसी इनोवेशन समिट होगी तो शायद यहां मौजूद उद्योग जगत के प्रतिनिधियों में से कोई आने को तैयार नहीं होता. उस समय Lucknow की पहचान निवेश के अनुकूल शहर के रूप में नहीं थी. निवेशकों के मन में यहां की कानून व्यवस्था को लेकर आशंकाएं थीं. उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ही सुरक्षित नहीं होगा तो उसकी पूंजी कैसे सुरक्षित रहेगी. यही वजह थी कि निवेशक उत्तर प्रदेश आने से बचते थे.
उन्होंने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश की पहचान उपद्रव, अराजकता और माफिया प्रवृत्ति के तत्वों के वर्चस्व से होती थी. राज्य पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार था. अकर्मण्यता और अव्यवस्था ने देश के सबसे युवा राज्य को बीमारू राज्यों की श्रेणी में पहुंचा दिया था. उत्तर प्रदेश अपनी पहचान खो चुका था. आज प्रदेश निवेश और तकनीक आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है. सीएम योगी ने वर्ष 2015-16 के इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय की Government ने उद्योग जगत के प्रमुख लोगों को Lucknow आने का निमंत्रण दिया था, लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया. निवेशकों का कहना था कि Lucknow के बारे में उन्होंने बहुत खतरनाक शहर के रूप में सुना है. इसके बाद तत्कालीन Government को दिल्ली के फाइव स्टार होटल में समिट आयोजित करनी पड़ी.
उन्होंने कहा कि निवेश का स्थान उत्तर प्रदेश था, लेकिन आयोजन दिल्ली में हो रहा था. ऐसे में निवेश के जो परिणाम सामने आए, वे किसी से छिपे नहीं हैं. Chief Minister ने कहा कि निवेश के लिए केवल नीतियां घोषित करना पर्याप्त नहीं होता. निवेशकों को अपनी पूंजी और कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ बेहतर कारोबारी माहौल का भरोसा भी चाहिए. Chief Minister योगी ने कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल बदलने के लिए कानून व्यवस्था, आधारभूत ढांचे और नीतिगत सुधारों पर एक साथ काम किया गया. इसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. इनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है. इसके अतिरिक्त साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव ग्राउंड ब्रेकिंग के लिए तैयार हैं.
उन्होंने कहा कि Government का लक्ष्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसरों में बदलना है. प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टोरल नीतियां बनाई गई हैं. निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है. Chief Minister योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम हो रहा है. वर्ष 2030-31 तक प्रदेश में 500 नए जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए चार करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करने की योजना है. समिट में प्रदर्शित लघु फिल्म में बताया गया कि प्रदेश में पहले से 200 से अधिक जीसीसी, 400 से ज्यादा एसटीपीआई-पंजीकृत आईटी एवं आईटीईएस इकाइयां और 4.3 करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस उपलब्ध है. नोएडा जीसीसी के स्थापित केंद्र के रूप में उभरा है, जबकि Lucknow में भी इस क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है. Kanpur समेत अन्य शहरों में भी संभावनाएं विकसित की जा रही हैं.
उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर वर्ष बड़ी संख्या में तकनीकी स्नातक तैयार हो रहे हैं. Government का लक्ष्य छह लाख एसटीईएम स्नातकों की प्रतिभा क्षमता तैयार करना है, ताकि वैश्विक कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके. समिट में Chief Minister योगी ने पांच प्रमुख जीसीसी परियोजनाओं के लिए कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट प्रदान किए. इनमें हैवेल्स, एमरी प्राइस, मेटलाइफ, एलजी और डब्ल्यूएसपी शामिल हैं. इन परियोजनाओं से 6,467 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है.
इसके साथ ही जीसीसी निवेशकों के साथ 15 एमओयू का आदान-प्रदान किया गया. इनमें ईवाईजीडीएस, एएमएल राइटसोर्स, कंप्यूटसेंटर, मेटलाइफ, डीएसवी, स्मार्टवर्क्स, डेमैक, एलट्रूस्ट, पेटीएम, एडब्ल्यूएस, बार्कलेज, नौकरी और आईबीएन समेत अन्य कंपनियां शामिल रहीं. तकनीकी प्रतिभा और उद्योग की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल के लिए 13 विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी संस्थानों के साथ भी समझौते किए गए. इनमें आईआईटी Kanpur, आईआईटी बीएचयू, आईआईटी रुड़की, आईआईएम Lucknow, आईआईआईटी Lucknow, एकेटीयू, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, Lucknow विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख संस्थान शामिल हैं.
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रतिनिधि बृजेश शर्मा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में 634 करोड़ रुपए का निवेश करेगी. इसमें प्रतिभा विकास और अनुसंधान एवं विकास से जुड़े बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जाएगा. परियोजना से 500 से अधिक उच्च-मूल्य वाली नौकरियां सृजित होने की संभावना है. स्मार्टवर्क्स के प्रतिनिधि हर्ष बिनानी ने बताया कि कंपनी नोएडा में 20 लाख वर्ग फीट क्षेत्र का प्रबंधन कर रही है, जहां 110 से अधिक कंपनियां मौजूद हैं. Lucknow के बीबीडी टाइम्स स्क्वायर में भी दो लाख वर्ग फीट क्षेत्र विकसित किया गया है. उन्होंने प्रदेश में निवेश प्रक्रिया और मिले सहयोग का उल्लेख किया.
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के प्रतिनिधि राजीव कुमार ने नोएडा में कंपनी के विस्तार का अनुभव साझा किया. उन्होंने कहा कि निवेश के लिए प्रतिभा, सुरक्षा और बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण हैं. नोएडा में माइक्रोसॉफ्ट का केंद्र तीन वर्षों में तीन हजार कर्मचारियों तक पहुंच चुका है. एचसीएल टेक के प्रतिनिधि किरण चेरुकुरी ने बताया कि कंपनी Lucknow में 12,500 कर्मचारियों के साथ काम कर रही है. उन्होंने एआई आधारित जीसीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए एडब्ल्यूएस और डीप-टेक नवाचार के लिए आईआईटी Kanpur के साथ सहयोग की जानकारी दी.
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हवाई संपर्क, मेट्रो, औद्योगिक भूमि और तकनीकी शिक्षा के विस्तार ने निवेश की संभावनाएं बढ़ाई हैं. प्रदेश में 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है. पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डों के नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या 120 से बढ़कर लगभग 25 हजार तक पहुंच चुकी है. हर वर्ष करीब दो लाख एसटीईएम स्नातक तैयार हो रहे हैं. इस प्रतिभा को तकनीक आधारित उद्योगों से जोड़ने पर Government का विशेष जोर है.
कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के मार्गदर्शन और Chief Minister योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जीसीसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी उद्योगों के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है. प्रदेश में एक हजार से अधिक व्यवसाय अनुकूल सुधार लागू किए गए हैं.
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विकेटी/डीकेपी
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