
New Delhi, 29 अक्टूबर . भारतीय स्पिनर वैष्णवी शर्मा ने बताया कि कैसे उन्होंने मैच से पहले की घबराहट को दूर किया और वडोदरा में Wednesday को जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में अपने करियर में पहली बार 5 विकेट चटकाए. उनकी इस शानदार गेंदबाजी की मदद से भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 8 विकेट से जीत दर्ज की और सीरीज को 3-0 से अपने नाम किया.
Thursday को बीसीसीआई द्वारा अपने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर किए गए एक वीडियो में इस बाएं हाथ की स्पिनर ने अपने इस बेहतरीन प्रदर्शन का श्रेय ‘India ए’ के साथ मिले अनुभव, अपनी साथियों के सपोर्ट और खुद को शांत रखने की कोशिश को दिया. वैष्णवी ने कहा, “5 विकेट लेने का एहसास बिल्कुल अलग होता है. जब आप कड़ी मेहनत करते हैं और फिर मैदान पर आकर 5 विकेट लेते हैं, तो यह वाकई बहुत शानदार एहसास होता है. वापसी का एहसास बहुत अच्छा था. इसके साथ ही मैं काफी घबराई हुई थी. वनडे सीरीज के पहले दिन मैं बहुत नर्वस थी. पहले मैच में मैं बाहर बैठी थी. मैंने स्थिति को समझा और सोचा कि मुझे क्या करना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “बल्लेबाज क्या कर रही हैं? मैं मैदान पर क्या कर सकती हूं? जब मुझे दूसरे मैच में खेलने का मौका मिला, तब भी मैं बहुत नर्वस थी. मैं रात को ठीक से सो नहीं पाई. मैं बहुत कुछ सोच रही थी. मैं मन ही मन सोच रही थी कि मुझे क्या करना है. आखिरकार, मैंने मैदान पर खुद को शांत किया. मैंने अपनी घबराहट पर काबू पाया और फिर मैदान पर अपना खेल दिखाया. मैंने सोचा, ठीक है, चलो आनंद लेते हैं.”
20 साल की इस खिलाड़ी ने सीरीज के आखिरी मैच में मिले मौके का पूरा फायदा उठाया. उन्होंने 10 ओवर में 39 रन देकर 5 विकेट लिए, जिससे जिम्बाब्वे की पूरी टीम 131 रन पर ऑलआउट हो गई. वैष्णवी ने ‘India ए’ के साथ अपने अच्छे प्रदर्शन के बारे में भी बात की. वहां लगातार विकेट लेने से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार होने में काफी मदद मिली और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा.
वैष्णवी ने कहा, “मैंने ‘ऑस्ट्रेलिया ए’ सीरीज में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था. एक बार 6 विकेट लिए, फिर 4 विकेट चटकाए. मैं उस सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज रही. इससे मुझे काफी आत्मविश्वास मिला, जिसे मैं आगे भी लेकर आई. कोचों से बात करने के बाद हमने एक प्लान बनाया था, बस हमें उसे मैदान पर लागू करना था. मुझे अपना पांचवां विकेट मिलने वाला था. मैंने भगवान से प्रार्थना की, ‘हे भगवान, बस एक और विकेट दिला दो.’ जब मैं 5 विकेट लेने के करीब पहुंची, तो बाकी सब भी बहुत उत्साहित थीं. आज के मैच में जब मैंने अपना पहला विकेट लिया, तो सबने कहा, ‘कल तुमने 5 विकेट लिए थे, आज फिर से वैसा ही करो.”
उन्होंने आगे कहा, “दीप्ति, शेफाली, स्मृति, हरमनप्रीत और हरलीन – सभी मेरा बहुत हौसला बढ़ा रही थीं. सच कहूं तो, हर कोई मुझे सपोर्ट कर रहा था. मुझे बहुत मजा आया. जब मैं विकेट गिन रही थी, तो सबका चेहरा देख रही थी. चौथे विकेट के बाद जब मैं कुछ देर तक विकेट नहीं ले पाई, तो मेरी हर गेंद पर सब हंसने लगीं. आखिरी गेंद पर सबने कहा, ‘अब तुम सारे भगवानों से प्रार्थना करो कि तुम्हें एक विकेट मिल जाए.’ फिर एक चमत्कार हुआ. बल्लेबाज ने स्वीप शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद पैड से नहीं लगी और सीधे स्टंप्स से जा टकराई. भगवान, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.”
पांचवां विकेट लेने का इंतजार वैष्णवी के लिए एक भावनात्मक परीक्षा जैसा था. स्पिनर ने माना कि जब पारी खत्म होने वाली थी, तो उन्हें इस बात की चिंता होने लगी थी कि कहीं वह इस खास उपलब्धि तक पहुंचने से चूक न जाएं. वैष्णवी ने कहा, “पांचवें विकेट के इंतजार ने मुझे बहुत तनाव में डाल दिया था. मैं सोच रही थी, ‘यार, यह विकेट कब गिरेगा?’ लेकिन अंत में जब आखिरी ओवर बचा था—सिर्फ छह गेंदें बाकी थीं—तो मैंने सोचा, ‘अगर विकेट मिल जाए तो बहुत बढ़िया, वरना आराम से गेंदबाजी करो, अपना स्पेल पूरा करो और काम खत्म करो.’ इसके साथ ही मुझे यह सोचकर हंसी भी आ रही थी कि वाह, आखिरकार वह आखिरी विकेट मिल ही गया.”
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एसएम/पीएम
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