
कटरा, 13 अक्टूबर . शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन देशभर के शक्तिपीठों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है. जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे. सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर Police और श्राइन बोर्ड के स्टाफ की निगरानी में श्रद्धालु कतारों में खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.
बिहार के नालंदा जिले से आए श्रद्धालु आशीष कुमार ने कहा कि मां का बुलावा आया है और वे पूरे उमंग के साथ दर्शन करने आए हैं. उन्होंने कहा, “मुझे मां के दर्शन की इतनी उत्सुकता है कि मैं बयां नहीं कर सकता. जैसे ही मां के दर्शन होंगे, मैं धन्य हो जाऊंगा. मैं पहले भी आता रहा हूं लेकिन नवरात्रि में यह मेरा पहला मौका है. माता के दर्शन कर अपने बिहार वासियों के लिए सुख-शांति की कामना करूंगा.”
Madhya Pradesh से आए सचिन प्रजापति ने बताया कि शारदीय नवरात्रि के इस पावन पर्व पर मां ने उन्हें बुलाया है, यह उनके लिए बहुत खुशी की बात है. वे अपनी टीम के साथ आए हैं. उनके साथ उनके भाई पवन प्रजापति और बंटी प्रजापति भी हैं. सचिन ने कहा, “मैं इसी साल में तीसरी बार आया हूं लेकिन शारदीय नवरात्रि में पहली बार आया हूं.”
उन्होंने कहा कि नवरात्रि में भवन की सजावट देखने लायक होती है. फूलों और लाइटों से पूरे भवन को दुल्हन की तरह सजाया जाता है. अभी जो सजावट देखी है, वह बहुत अच्छी है और आगे और भी बेहतर देखने की उम्मीद है.
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन प्रयागराज के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां ललिता देवी मंदिर में भी मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. श्रद्धालुओं ने चुनरी, नारियल, फल-फूल और मिष्ठान अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की. सुबह मंगला आरती के साथ दर्शन-पूजन की शुरुआत हुई. मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं.
श्रद्धालु नीलम प्रसाद पाल ने कहा, “मां ललिता देवी का यह मंदिर बहुत ही शक्तिशाली माना जात है. सब लोग अपनी कामना लेकर मां के चरणों में आते हैं और मां सबकी मनोकामना पूरी करती हैं. हर नवरात्रि में यहां आने की कोशिश करते हैं, बीच में भी आते हैं, क्योंकि मां में बहुत शक्ति है और वे सबकी रक्षा करती हैं. मन में जो इच्छा लेकर आते हैं मां सबकी प्रार्थना सुनती हैं और पूरी करती हैं.”
मंदिर के पुजारी ने बताया कि आज नवरात्रि का तीसरा दिन है और आज भगवती चंद्रघंटा के स्वरूप का पूजन हो रहा है. प्रयागराज का यह शक्तिपीठ है, जहां मान्यता है कि सती जी के हाथ की उंगलियां गिरी थीं. यहां मां काली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में विराजमान हैं.
पुजारी ने बताया कि पुराणों में मिलता है कि पांडव जब अज्ञातवास से निकले तो उन्होंने यहां कुंड का निर्माण किया और उसी के जल से भगवती की पूजा की. आज भी यहां मेला लगता है. नवरात्रि में प्रतिदिन प्रातः 5 बजे आरती के बाद मंदिर के पट खुल जाते हैं. सुबह से ही दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन, श्रृंगार और भंडारे जैसे कार्यक्रम दिनभर चलते रहते हैं और रात 12 बजे शयन आरती के बाद पट बंद होते हैं.
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मिर्जापुर स्थित आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी धाम में भी भक्तों का तांता लगा रहा . भक्त लंबी कतारों में लगकर “जय माता दी” के जयकारे लगाते हुए दर्शन और पूजन कर रहे हैं. एक श्रद्धालु ने कहा, “माता का दर्शन करने से मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन में संपन्नता आती है. यहां Government की तरफ से व्यवस्था बहुत ही सुंदर है. किसी को कोई परेशानी नहीं हो रही है. दर्शन की व्यवस्था बहुत अच्छी है.”
–
पीआईएम/पीएम
Skip to content