कजाकिस्तान में सैन्य अभ्यास, आतंकियों की खोज, विनाश व घेराबंदी का मिशन पूरा

New Delhi, 11 अक्टूबर . India और कजाकिस्तान का संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘काजिंद-2026’ Sunday को कजाकिस्तान के ओस्केमेन में अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया. अभ्यास के दौरान आतंकवादी गतिविधियों की स्थिति से निपटने के लिए कई तरह के अभियान किए गए. इनमें आतंकियों ठिकानों पर छापेमारी, खोज और विनाश अभियान, घेराबंदी और तलाशी अभियान शामिल रहा. यह अभ्यास 28 सितंबर से हुआ था और 11 अक्टूबर तक जारी रहा.

सैन्य अभ्यास ‘काजिद-2026’ का मुख्य फोकस संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान रहा. दोनों देशों की सेनाओं को यहां अर्ध-शहरी और पहाड़ी इलाकों को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण दिया गया. दोनों देशों जवानों ने मिलकर यहां अभियान की योजना बनाई और उसे जमीन पर लागू किया. वहीं हवाई आवागमन पर भी खास ध्यान रहा.

सेना के मुताबिक यह काजिद अभ्यास का नौवां संस्करण था. यहां पहुंचे भारतीय दल में मुख्य रूप से गढ़वाल राइफल्स की एक बटालियन के जवान शामिल थे. इनके साथ अन्य सैन्य शाखाओं और सेवाओं के जवान तथा भारतीय वायुसेना के कर्मी भी इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे थे. अभ्यास के दौरान संयुक्त कमान केंद्र और खुफिया एवं निगरानी केंद्र भी स्थापित किए गए. इन निगरानी केंद्रों में दोनों देशों की सेनाओं ने मिलकर काम किया.

अभ्यास के अंत में दोनों देशों की सेनाओं ने एक व्यापक सत्यापन अभ्यास पूरा किया. इस मिशन में प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई रणनीति, तकनीकों और प्रक्रियाओं को एक काल्पनिक आतंकवादी खतरे के खिलाफ इस्तेमाल किया गया. इससे दोनों सेनाओं की वास्तविक अभियान के दौरान साथ काम करने की क्षमता को परखा गया.

‘काजिंद-2026’ ने दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे के अभियान संबंधी अनुभवों से सीखने और आपसी विश्वास व पेशेवर संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी दिया. इस अभ्यास ने India और कजाखस्तान के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत भी किया. काजिद अभ्यास के इस नौवे संस्करण के दौरान मानवरहित हवाई प्रणालियों और उनके हमले रोकने वाली प्रणालियों का भी एकीकृत इस्तेमाल किया गया. इससे दोनों सेनाओं को आधुनिक तकनीक के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों में तालमेल बढ़ाने का अवसर भी मिला.

वहीं, 11 अक्टूबर को वायुसेना का बहुराष्ट्रीय ‘तरंग शक्ति-2026’ अभ्यास भी अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया. यह अभ्यास भारतीय वायुसेना और मित्र देशों की वायु सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और परिचालन अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ. यहां अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की भागीदारी के कारण हवाई युद्धाभ्यास और संयुक्त सामरिक प्रशिक्षण का दायरा भी काफी व्यापक रहा.

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जीसीबी/डीकेपी