
कच्छ, 12 अक्टूबर . वन विभाग के अनुसार, सितंबर में Gujarat के कच्छ जिले में काला डूंगर इलाके में गश्त के दौरान सांपों की दो ऐसी प्रजातियां एक साथ देखी गईं जो बहुत कम दिखाई देती हैं. इनमें से ‘एफ्रो-एशियन सैंड स्नेक’ का दिखना राज्य में इस प्रजाति के देखे जाने का शायद दूसरा या तीसरा दर्ज मामला हो सकता है.
ये सांप खावड़ा राउंड में रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर और स्थानीय फॉरेस्ट स्टाफ की शाम की गश्त के दौरान देखे गए. वन विभाग ने बताया कि ये दोनों प्रजातियां कच्छ में बहुत कम देखी गई हैं और कई सालों बाद एक ही जगह पर एक साथ देखी गई हैं.
इनमें से एक सांप ‘ब्लैक-हेडेड रॉयल स्नेक’ (‘स्पैलेरोसोफिस एट्रिसेप्स’) था, जो जहरीला नहीं होता है. दूसरा ‘एफ्रो-एशियन सैंड स्नेक’ (‘सैममोफिस शोकारी’) था, जिसे विभाग ने हल्का जहरीला बताया है. इसका जहर इंसानों के लिए जानलेवा नहीं होता है.
सैंड स्नेक लगभग 70 सेंटीमीटर लंबा था. Gujarat में एफ्रो-एशियन सैंड स्नेक का पाया जाना बहुत दुर्लभ माना जाता है.विभाग ने सांपों के जानकार अजय देसाई की किताब ‘सर्प संदर्भ’ का जिक्र किया, जिसमें कच्छ के लोदाई में इस प्रजाति के पहले फोटोग्राफिक रिकॉर्ड का जिक्र है.
हाल ही में देखा गया यह सांप Gujarat में दर्ज किया गया दूसरा या तीसरा मामला हो सकता है. हालांकि विभाग ने पक्के रिकॉर्ड की कुल संख्या नहीं बताई. 462 मीटर की ऊंचाई पर स्थित काला डूंगर, कच्छ की सबसे ऊंची चोटी है.
विभाग ने इस इलाके में दुर्लभ वन्यजीवों के पाए जाने का कारण जिले के अनोखे इकोसिस्टम और शुष्क जलवायु को बताया है. यह घटना फॉरेस्ट डिवीजन द्वारा सांपों और उनके संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिशों के बीच हुई है.
कच्छ ईस्ट फॉरेस्ट डिवीजन हर साल 19 सितंबर को ‘विश्व सांप के काटने से जुड़ी जागरूकता दिवस’ के तौर पर मनाता है. इन गतिविधियों में जागरूकता साइनबोर्ड, वन्यजीव जागरूकता कार्यक्रम, प्रकृति शिक्षा शिविर और स्थानीय निवासियों के लिए अन्य पहल शामिल हैं.
वन विभाग ने इस इलाके में आने वाले निवासियों और पर्यटकों से दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा में सहयोग करने और सांपों को नुकसान न पहुंचाने या उनके प्राकृतिक आवास को परेशान न करने की अपील की है. विभाग ने कहा कि इलाके की जैव-विविधता के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है.
–
डीकेएम/पीएम
Skip to content