एसटीपी घोटाला मामला : डीजेबी के पूर्व सीईओ सहित पांच आरोपियों को मिली जमानत

New Delhi, 9 सितंबर . दिल्ली की एक अदालत ने Wednesday को दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय और चार अन्य लोगों को जमानत दे दी. यह मामला सिविक बॉडी में कथित भ्रष्टाचार और टेंडर में हेरफेर से जुड़ा है.

राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (पीसी एक्ट) दिगविनय सिंह ने राय, नागेंद्र यादव, राज कुमार कुर्रा, पंकज वर्मा और अंकित श्रीवास्तव को जमानत दे दी. कोर्ट ने सभी आरोपियों को 2-2 लाख रुपए के पर्सनल बॉन्ड पर जमानत दी.

इन पांचों आरोपियों को दिल्ली Government की एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने 18 अगस्त को गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी राष्ट्रीय राजधानी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को बेहतर और अपग्रेड करने की टेंडर प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और टेंडर में हेरफेर के मामले में की गई थी.

ये गिरफ्तारियां 11 मई 2024 को एसीबी Police स्टेशन में दिल्ली डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस की शिकायत पर दर्ज First Information Report के सिलसिले में की गई थी.

First Information Report में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 7, 7ए, 9 और 13 के साथ-साथ इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की धारा 420, 409, 418 और 120-बी लगाई गई हैं.

इस मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन भी शामिल हैं, जिन्हें इसी कोर्ट ने 3 सितंबर को जमानत दी थी.

एसीबी के अनुसार, यह मामला डीजेबी के एसटीपी प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, टेंडर की शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश से जुड़ा है.

जांच के दौरान, एसीबी को कथित तौर पर पता चला कि टेंडर प्रक्रिया में ऐसी तकनीकी शर्तें और नियम शामिल थे जो एक खास टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर, मेसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को फायदा पहुंचा रहे थे.

एंटी-करप्शन एजेंसी का दावा है कि इन शर्तों ने कॉम्पिटिशन को सीमित कर दिया और चुनी हुई प्राइवेट कंपनी को अनुचित फायदा पहुंचाया.

एसीबी ने यह भी आरोप लगाया कि एसटीपी अपग्रेडेशन के काम के लिए प्रस्तावित पायलट स्टडी नहीं की गई और टेंडर में टेक्नोलॉजी और इस्तेमाल होने वाले मीडिया से जुड़ी ऐसी शर्तें शामिल की गईं जबकि ट्रीटेड एफ्लुएंट (साफ किए गए पानी) से जुड़े जरूरी पैरामीटर्स को छोड़ दिया गया.

जांचकर्ताओं के अनुसार, बाद में तकनीकी शर्तों में बदलाव किया गया, जिसके कारण सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा.

एसीबी ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया के सिलसिले में प्राइवेट लोग कुछ सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों के लगातार संपर्क में थे. इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच से पता चला है कि प्रोजेक्ट से जुड़ी पाबंदी वाली टेंडर शर्तें, सुधार और दूसरे दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ था, जिन्हें बाद में डीजेबी द्वारा जारी एसटीपी टेंडर में शामिल किया गया.

भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि मेसर्स सृजनहार और मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज जैसी बीच की कंपनियों के जरिए कमीशन या रिश्वत का पैसा इधर-उधर किया गया.

जांच एजेंसी के मुताबिक, मेसर्स यूरोटेक से जुड़ी कंपनियों से आरोपी नागेंद्र यादव की प्रोप्राइटरशिप वाली फर्म में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी. जांच में सरकारी अधिकारियों, जिनमें डीजेबी के तत्कालीन सीईओ राय और उनके रिश्तेदार भी शामिल हैं, को फंड ट्रांसफर करने से जुड़े लेनदेन का भी पता चला है.

एसीबी का आरोप है कि राय ने मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज से बैंकिंग चैनलों के जरिए अपने और अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में कुल मिलाकर लगभग 1.52 करोड़ रुपए की रिश्वत ली. जांच एजेंसी का दावा है कि यह पैसा मेसर्स यूरोटेक से आया था.

एससीएच/पीएम