एसआईआर विवाद में सीईसी ज्ञानेश कुमार के बचाव में भाजपा क्यों उतरी?: सौगत रॉय

कोलकाता, 28 सितंबर . टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में हुई झड़प, एबीवीपी के घटना में शामिल होने से इनकार, एसआईआर विवाद, इंडिया ब्लॉक की 30 सितंबर को प्रस्तावित बैठक, टीएमसी विधायक कुणाल घोष पर हुए हमले समेत कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी.

एसआरएफटीआई में हुई झड़प को लेकर सौगत रॉय ने कहा कि वह घटना की निंदा करते हैं. India Government की ओर से संचालित इस प्रतिष्ठित संस्थान में भी बाहर से लोगों को लाकर हमला किया गया. वहां पर एबीवीपी से जुड़े लोगों ने हमला किया.

एबीवीपी की ओर से घटना में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किए जाने पर सौगत रॉय ने कहा कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं है. हालांकि, उन्होंने दावा किया कि एसआरएफटीआई के ऑडिटोरियम में जिस संस्था की सभा हो रही थी, उसका भाजपा से संबंध बताया जा रहा है और उन्होंने ही बाहर से लोगों को बुलाकर हमला किया.

एसआईआर विवाद को लेकर सौगत रॉय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में भाजपा नेताओं के सामने आने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहा है और एसआईआर के मामले में चुनाव आयोग के गलत इस्तेमाल का आरोप लगा रहा है. विपक्ष इस मुद्दे पर अपने रुख पर कायम है और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

30 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की बैठक को लेकर सौगत रॉय ने कहा कि बैठक के लिए बातचीत की शुरुआत सीपीएम के सचिव ने ममता बनर्जी से की थी. इसके बाद ममता बनर्जी ने राहुल गांधी से बातचीत की और राहुल गांधी के आह्वान पर 30 सितंबर को बैठक बुलाई गई. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी बैठक में शामिल होंगे.

नेताजी इंडोर स्टेडियम में गीता पाठ कार्यक्रम के दौरान सुवेंदु अधिकारी के इस बयान पर कि बंगाल में संतों का अपमान करने पर जेल जाना पड़ सकता है, सौगत रॉय ने कहा कि संतों का अपमान नहीं किया जाना चाहिए; यह बात सही है. उन्होंने आगे कहा कि किसी संत की चर्चा या आलोचना करने पर किसी व्यक्ति को जेल भेजना लोकतंत्र के खिलाफ होगा. Government अगर आलोचना को रोकने के लिए इस तरह का रास्ता अपनाती है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है.

हुमायूं कबीर द्वारा सुवेंदु अधिकारी की मौत की कामना किए जाने पर सौगत रॉय ने कहा कि किसी के भी मरने की कामना नहीं करनी चाहिए. चाहे सुवेंदु अधिकारी हों या कोई और, इस तरह की बात उचित नहीं है. संभव है कि हुमायूं कबीर जिस स्थिति और कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, उससे वह काफी हताश रहे हों, लेकिन इसके बावजूद उन्हें इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी.

टीएमसी विधायक कुणाल घोष पर हुए कथित हमले को लेकर सौगत रॉय ने घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि Police इस मामले में कुछ नहीं कर रही है. यह आवाज दबाने की कोशिश है और ऐसी कोशिश सफल नहीं होगी. मामले में कार्रवाई करना Police की जिम्मेदारी है और Police को इस संबंध में कदम उठाना चाहिए.

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