
New Delhi, 27 अक्टूबर . Supreme Court ने Tuesday को Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य इंडिया ब्लॉक नेताओं द्वारा भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को ईसीआई के हलफनामे पर 10 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
इसमें चुनाव आयोग को आवश्यकता पड़ने पर इसी अवधि के भीतर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने की छूट भी दी गई है. इस मामले पर दिवाली की छुट्टियों के बाद सुनवाई होगी.
राहुल गांधी और विपक्ष के 12 अन्य नेताओं द्वारा दायर याचिका में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मतदाता नामों को हटाने और अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची संशोधन के तरीके को चुनौती दी है.
इस मामले में प्रतिवादियों में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं.
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर को चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था और निर्देश दिया था कि इस याचिका को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाए, जिनमें विभिन्न राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई है.
मुख्य न्यायाधीश कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी संकेत दिया था कि वह अगली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण की जांच करेगी. बाद में स्पष्ट किया कि शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की ओर से दायर याचिका को उनके आचरण का स्पष्टीकरण देने के बाद ही अस्थायी रूप से स्वीकार किया जाएगा.
यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के बारे में राउत की टिप्पणियों पर हुए विवाद के बाद आया है. मुख्य न्यायाधीश ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से एसआईआर प्रक्रिया पर ज्ञापन लेने के लिए मिलने से इनकार कर दिया था.
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक करना शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत होगा.
इसी बीच Supreme Court बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ उनकी टिप्पणियों को लेकर राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका दायर की है. सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर को दोनों को नोटिस जारी कर कारण बताने को कहा कि उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए.
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एएसएच/
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