
New Delhi, 3 अक्टूबर . एसआईआर को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें केवल मोहरा करार दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग राहुल गांधी द्वारा दो साल पहले शुरू किए गए आंदोलन के दबाव में अब अपने फैसले बदल रहा है. विपक्ष का कहना है कि फ्री एंड फेयर इलेक्टोरल रोल के बिना फ्री एंड फेयर चुनाव संभव नहीं है और आयोग को देश से माफी मांगकर स्पष्ट करना चाहिए कि किसके इशारे पर असली वोटरों को लिस्ट से बाहर करने की कोशिश हुई.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “एसआईआर के लिए हो रही नई कोशिशों के बारे में चुनाव आयोग को सबसे पहले देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए और खुलकर बताना चाहिए कि क्या हुआ, किसके कहने पर हुआ और क्यों हुआ. देशभर में चल रहे आंदोलन के दबाव में चुनाव आयोग अब अपना तरीका बदलने लगा है. आंदोलन दो साल पहले हमारे नेता राहुल गांधी ने शुरू किया था और बाद में दूसरी पार्टियों ने भी इसका साथ दिया. राहुल गांधी का उठाया हुआ एक नारा पहले देशभर का नारा बन गया: वोट दो या कुर्सी छोड़ो.
उन्होंने कहा कि इसमें स्पष्टीकरण होना चाहिए, क्योंकि इसके साथ-साथ लाखों लोग अभी इस हालत को झेल रहे हैं और इसमें हमारी सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बंगाल में है, जहां 7,74,000 लोग हैं. तो जो चुनाव आयोग कहता है कि जो लोग वोट नहीं दे पाए, दोबारा उनके लिए फॉर्म भरा जाएगा, तो क्यों ट्रिब्यूनल में फंसे लोगों के लिए नहीं किया जाता?
कांग्रेस नेता ने कहा कि दूसरी बात, चुनाव खत्म होने के बाद उनको लगा कि अब फिर वोटर लिस्ट में कुछ नाम शामिल करो. इसका मतलब यह स्पष्ट हो गया कि चुनाव आयोग सामने के दरवाजे से न सही, बल्कि पीछे के दरवाजे से यह मानता है कि राहुल गांधी के अगुवाई में हमने देश में जो आंदोलन और शेर-ओ-शायरी का जो तेवर था, जो रूप था, उसको मान्यता देते हैं.
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इसमें सवाल यह है कि फेयर इलेक्शन तब होते हैं जब फेयर एंड फ्री इलेक्टोरल रोल होते हैं. यह मेरा मत नहीं, यह Supreme Court का ऑब्जर्वेशन है तो फ्री एंड फेयर इलेक्शन कैसे हुआ, जब फ्री एंड फेयर मतदाता सूची ही नहीं थी. अगर किसी की जीत-हार एक वोट के अंतर से हो और कोई एक व्यक्ति वोट देने में नाकामयाब रहे और वह भी चुनाव आयोग की गलती से, तो इसकी जिम्मेदारी किस पर होगी, यह भी तय करना चाहिए. हम लोग यह मांग भी करेंगे, सड़क पर करेंगे, सदन में करेंगे.
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि सीडब्ल्यूसी की बैठक में मल्किर्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की उपस्थिति में सबकुछ तय हो गया है कि हम ये लड़ाई तब तक लड़ेंगे जब तक कि वोट चोरी नहीं रुकेगा. ज्ञानेश कुमार केवल मोहरा हैं. उनके माध्यम से वोट चोरी की जा रही है. हम ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ाई जरूर लड़ रहे हैं, लेकिन हमारा मुख्य मकसद Prime Minister को अपदस्थ करना है.
जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा, “मौजूदा केंद्र Government लोगों के भरोसे के साथ खेल रही है और उनका भरोसा तोड़ रही है. यह ऑटोनॉमस संस्थाओं में ऐसे लोगों को अपॉइंट कर रही है जो करप्ट हैं. जिस तरह से सच सामने आया है, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने इलेक्शन कमीशन के बाकी दो सदस्यों को अंधेरे में रखा और उनकी सहमति या जानकारी के बिना, ऐसे कदम उठाए गए जिनसे असली वोटर्स को परेशान किया गया और उन्हें वोट देने के उनके अधिकार से दूर करने की कोशिश की गई.”
शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि जिस ढंग से इस देश में चुनाव आयोग काम कर रहे हैं, वो ईसी कभी नहीं करती. ये तो सत्ता पक्ष के इशारे पर काम हुआ. अब आपस में झगड़ा हुआ तो पता चला. सिर्फ चुनाव आयोग ही नहीं, सभी व्यवस्थाएं भ्रष्ट हुई है. न्यायिक व्यवस्था क्या कर रही है? संविधान के तहत मिलने वाले मूलभूत अधिकार हमसे छीने जा रहे हैं. ये देश का सत्यानाश कर रहे हैं.
–
Skip to content