एसआईआर में हुई गड़बड़ी, सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाया जाना चाहिए : प्रसन्न आचार्य

भुवनेश्वर, 30 सितंबर . विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों के बीच बीजू जनता दल (बीजेडी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराई है. बीजेडी के वरिष्ठ नेता और Odisha विधानसभा में विपक्ष के उपनेता प्रसन्न आचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी का रुख इस मुद्दे पर पहले दिन से स्पष्ट है.

बीजेडी के वरिष्ठ नेता और Odisha विधानसभा में विपक्ष के उपनेता प्रसन्न आचार्य ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि बीजेडी अध्यक्ष और विपक्ष के नेता नवीन Patnaयक ने शुरुआत से ही एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर पार्टी की स्थिति स्पष्ट कर दी है, जिस तरह से मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में एसआईआर की प्रक्रिया संचालित की जा रही है, उससे लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा हो रहा है.

उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से कुछ लोगों के नाम हटाए जाते हैं जबकि नए नाम भी जोड़े जाते हैं. आचार्य ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में मतदाता Government चुनते हैं, लेकिन अब ऐसा लगता है कि Government मतदाता चुन रही है. अगर सत्ताधारी पार्टी नहीं चाहे तो कोई व्यक्ति मतदाता नहीं बन सकता.”

आचार्य ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिस तरह से मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग का संचालन कर रहे हैं, वह लोकतांत्रिक मानदंडों को लेकर चिंता पैदा करता है. उन्होंने विशेष रूप से एसआईआर के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया और इसे लेकर पार्टी की आपत्ति दोहराई.

वहीं, इंडी गठबंधन की बैठक के सवाल पर प्रसन्न आचार्य ने स्पष्ट किया कि बीजेडी न तो इंडी गठबंधन का हिस्सा है और न ही एनडीए का. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की लंबे समय से दोनों Political गठबंधनों से समान दूरी बनाए रखने की नीति रही है और यह नीति आगे भी जारी रहेगी.

उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर बीजेडी ने अपना रुख स्पष्ट किया है. इनमें चुनाव आयोग से जुड़ी हालिया घटनाएं शामिल हैं. इन मुद्दों पर पार्टी के अध्यक्ष नवीन Patnaयक और अन्य नेताओं ने शुरुआत से ही अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की है.उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर की प्रक्रिया जिस तरीके से पूरी की गई, उससे मतदाताओं के बीच संदेह पैदा हुआ है और बीजेडी इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियां लगातार उठाती रहेगी.

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पीएम