एशियन गेम्स: कबड्डी में गोल्ड जीतने के बाद जयदीप बोले- घर से चूरमा और लड्डू जापान साथ ले गए थे

आइची, 26 सितंबर . भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने Saturday को ईरान के खिलाफ 40-34 से जीत हासिल करते हुए ‘गोल्ड मेडल’ अपने नाम किया. खिताबी जीत के बाद जयदीप ने बताया कि भारतीय खिलाड़ी जापान में भी चूरमा, लड्डू और खोया साथ लाए थे, ताकि एशियन गेम्स में अपने खिताब को बचाने पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

गोल्ड मेडल जीतने के बाद ‘ ’ से ​​बात करते हुए, जयदीप ने कहा कि खिलाड़ी अपने अभियान और ईरान की मजबूत टीम के खिलाफ फाइनल पर पूरी तरह केंद्रित थे. जयदीप ने बताया, “हम घर से चूरमा लाए थे. घर से लड्डू और खोया भी लाए थे, लेकिन यहां का खाना भी अच्छा था. हमें पराठा, रोटी वगैरह मिलती थी.”

भारतीय टीम ने टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में ईरान पर कड़ी टक्कर के बाद जीत हासिल करके आइची-नागोया में अपना अजेय अभियान पूरा किया.

पहले हाफ में India और ईरान के बीच कड़ा मुकाबला हुआ और हाफ-टाइम तक India 17-18 से पीछे था. हाफ-टाइम के बाद India ने खेल की गति बढ़ाते हुए धीरे-धीरे मुकाबले पर नियंत्रण बना लिया. India को 10 मिनट शेष रहते हुए पांच अंकों की बढ़त मिल गई थी. मैच के आखिरी पलों में भारतीय टीम ने संयम बनाए रखा; सुमित, राहुल सेठपाल और बाकी डिफेंस ने ईरान को वापसी का कोई मौका नहीं दिया और टीम ने 40-34 से जीत हासिल की.

जयदीप ने कहा कि टीम ईरान से मिलने वाली चुनौती के बारे में पूरी तरह से जागरूक थी और उनके पास प्रतियोगिता के अलावा किसी और चीज के बारे में सोचने का समय या मौका नहीं था.

उन्होंने कहा, “हम ध्यान केंद्रित था. हम इस मैच का इंतजार कर रहे थे. ईरान एक बहुत मजबूत टीम है. हमारे और गोल्ड मेडल के बीच यही एकमात्र मैच था. और हम यहां गोल्ड मेडल जीतने आए थे.”

जयदीप ने यह गोल्ड मेडल अपने भाई को समर्पित करते हुए कहा, “मैं यह मेडल अपने भाई को समर्पित करता हूं. उन्होंने मेरा बहुत साथ दिया है. मेरे भाई ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है. इसलिए, मैं यह मेडल अपने भाई को समर्पित करता हूं.”

भारतीय कबड्डी खिलाड़ी ने क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों को भी ज्यादा सपोर्ट करने की बात कही. उन्होंने जोर दिया कि अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी अपने करियर के दौरान बहुत मेहनत करते हैं और चोटों का सामना भी करते हैं. जयदीप ने कहा, “हर किसी को क्रिकेट खेलना चाहिए. यह अच्छी बात है, लेकिन हमें दूसरे खेलों को भी सपोर्ट करना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए.”

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आरएसजी