एशियन गेम्स: ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद कोच रवींद्र ने कहा, ‘थाईलैंड में कबड्डी लोकप्रिय हो रही है’

तोकाई (जापान), 26 सितंबर . थाईलैंड की पुरुष कबड्डी टीम के कोच रवींद्र शेट्टी ने कहा कि एशियन गेम्स में देश का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल वहां इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत है. 1990 में इस खेल की शुरुआत के बाद से महाद्वीपीय प्रतियोगिता में थाईलैंड का यह पहला पुरुष कबड्डी मेडल है.

Friday को तोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में सेमीफाइनल में India से 28-66 से हारने के बाद थाईलैंड ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. इस नतीजे के साथ थाईलैंड का अभियान ऐतिहासिक पोडियम फिनिश के साथ खत्म हुआ और पुरुष कबड्डी में 36 साल बाद एशियन गेम्स में उनका पहला मेडल आया.

रवींद्र पिछले तीन वर्षों से थाईलैंड में कबड्डी की कोचिंग दे रहे हैं, उन्होंने कहा कि उन्होंने 2022 हांगझोऊ एशियन गेम्स के बाद वहां बिल्कुल शुरुआत से काम शुरू किया था.

रवींद्र ने ‘ ’ को बताया, “मैं पिछले तीन वर्षों से वहां कबड्डी की कोचिंग दे रहा हूं. मैंने तीन साल पहले वहां शून्य से शुरुआत की थी. मैंने हांगझोऊ एशियन गेम्स के बाद शुरुआत की थी. उसके बाद मैंने काम शुरू किया. अब, कबड्डी सीखने के बाद वे आगे बढ़ रहे हैं. अब, थाईलैंड में भी कबड्डी लोकप्रिय हो रही है.”

थाईलैंड ने सेमीफाइनल तक पहुंचने के लिए शानदार प्रदर्शन किया, जहां उनका सामना मौजूदा चैंपियन India से हुआ. भारतीय टीम ने मुकाबले में दबदबा बनाए रखा, हाफ-टाइम तक 37-18 की बढ़त बनाई और फिर दूसरे हाफ में अपनी बढ़त को और बढ़ाते हुए 66-28 से जीत हासिल की.

India ‘ग्रुप-ए’ में चार जीत के साथ बिना कोई मैच हारे सेमीफाइनल में पहुंचा था, जबकि सेमीफाइनल में पहुंचने से ही थाईलैंड का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित हो गया था.

रवींद्र ने कहा कि थाईलैंड में जमीनी स्तर पर कबड्डी के विकास ने गति पकड़ी है, खासकर स्कूल प्रतियोगिताओं और युवा कार्यक्रमों के माध्यम से. उन्होंने कहा, “अभी, स्कूली स्तर पर कबड्डी शुरू हो रही है. हमारे अध्यक्ष हर चार महीने में युवा खेल आयोजित करते हैं. इसी वजह से कबड्डी का विकास हो रहा है.”

कोच ने बताया कि उनकी अकादमी में अभी 60 से ज्यादा युवा खिलाड़ी हैं, जिनमें लड़के और लड़कियां ट्रेनिंग के लिए थाईलैंड के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं. उन्होंने कहा, “अभी मेरी एकेडमी में 35 लड़कियां और 30 लड़के हैं. यह एक अच्छी बात है. बैंकॉक, चोनबुरी और दूसरे राज्यों से लड़कियाँ ट्रेनिंग के लिए हमारे पास आ रही हैं.”

रवींद्र 2023 में ईरान में हुए जूनियर वर्ल्ड कप में भारतीय कोचिंग टीम का हिस्सा थे और जूनियर भारतीय टीम की जिम्मेदारी संभालने से पहले प्रो कबड्डी लीग में कोच के तौर पर भी काम कर चुके थे. उन्होंने बताया, “2023 में ईरान में हुए जूनियर वर्ल्ड कप में मैं भारतीय कोच था. उस समय मैं प्रो कबड्डी कोच था. मैं 9वें सीजन में प्रो कबड्डी कोच था. उसके बाद, मैंने जूनियर भारतीय टीम की जिम्मेदारी संभाली.”

रवींद्र ने बताया कि बाद में एक अंतरराष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता की मीटिंग के दौरान अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और उन्हें थाईलैंड में इस खेल को आगे बढ़ाने का मौका दिया. उन्होंने कहा, “उसके बाद, इंटरनेशनल कबड्डी प्रतियोगिता की मीटिंग में उन्होंने मेरा नाम लिया और थाईलैंड में सीधे मुझसे संपर्क किया. तो, वहां से मुझे एक नया मौका मिला. उन्होंने कहा कि वे मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाएंगे, इसलिए मैं आ गया. मैं ब्रॉन्ज मेडल जीतकर बहुत खुश हूं.”

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आरएसजी