
चंडीगढ़, 30 सितंबर . पंजाब एवं Haryana हाई कोर्ट ने Wednesday को फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में पंजाब Government से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.
हाई कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि जिस कथित यौन उत्पीड़न की घटना के बाद हिंसा भड़की, वह वास्तव में हुई थी या नहीं.
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच एलपीयू के छात्र रवि राज की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में हिंसा की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है.
हालांकि, अदालत ने अभी सीबीआई जांच की मांग पर कोई आदेश नहीं दिया है. मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी.
हाई कोर्ट ने पंजाब Government को Police कमिश्नर के हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि 26 सितंबर को social media पर किए गए एक पोस्ट में जिस घटना का जिक्र किया गया था, वह वास्तव में हुई थी या नहीं.
कोर्ट ने यह भी पूछा है कि अगर कथित घटना हुई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई. अगर ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी तो social media पोस्ट को हटवाने और उसे फैलने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए.
यह मामला यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा से जुड़ा है. social media पर एक अपुष्ट पोस्ट वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि यूनिवर्सिटी कैंपस में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ और इसके बाद उसे घर भेज दिया गया.
इस पोस्ट के बाद अफवाहें फैलीं और छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया. बाद में प्रदर्शन हिंसक हो गया और तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं हुईं. संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया और जालंधर-फगवाड़ा हाईवे के एक हिस्से को जाम कर दिया गया.
सुनवाई के दौरान पंजाब Government ने अदालत को बताया कि मामले की जांच चल रही है.
पंजाब Government के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि Police social media पर किए गए पोस्ट के स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही है. Police कथित घटना के साथ-साथ उसके बाद हुई हिंसा की भी जांच कर रही है.
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार था और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है.
पंजाब Police ने हिंसा के मामले में तीन First Information Report दर्ज की हैं. आगजनी, लूट और Policeकर्मियों पर हमले समेत विभिन्न आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन भी किया गया है.
हिंसा के बाद यूनिवर्सिटी ने शैक्षणिक गतिविधियां रोक दी गई थीं. इसके साथ ही कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई.
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एएमटी/डीकेपी
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