
New Delhi, 29 सितंबर . वर्तमान में नीट यूजी की काउंसलिंग व एडमिशन प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में एमबीबीएस की अतिरिक्त सीटों के जुड़ने से उन छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो प्रवेश प्रक्रिया के अगले चरणों में बेहतर विकल्पों की तलाश कर रहे थे.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने Tuesday को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी बढ़ोतरी की जानकारी देते हुए बताया कि अकेले कर्नाटक में ही 1,650 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी मिली है. इसके बाद राज्य में एमबीबीएस की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 15,745 हो गई है. वहीं देशभर में 13,186 नई एमबीबीएस सीटों के साथ एमबीबीएस की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 1,40,214 हो गई है. ये सीटें देश के 836 चिकित्सा महाविद्यालयों में उपलब्ध होंगी.
प्रह्लाद जोशी ने इसे India के चिकित्सा शिक्षा तंत्र के लिए महत्वपूर्ण बढ़ावा बताया. उन्होंने कहा कि एमबीबीएस की सीटों में यह वृद्धि देश के युवाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का विस्तार करेगी और स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद करेगी. प्रह्लाद जोशी ने कहा कि देश में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का लगातार विस्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश यह Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में युवाओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास है. साथ ही एक मजबूत स्वास्थ्य सेवा तंत्र तैयार करने की दिशा में इसे एक और कदम है.
बता दें कि एमबीबीएस सीटों में वृद्धि से देश में डॉक्टर तैयार करने की क्षमता बढ़ेगी. साथ ही, चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने में भी इसका महत्व है. शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए हुए इस बड़े बदलाव से देश के नीट अभ्यर्थियों के लिए डॉक्टर बनने का सपना पूरा करना और अधिक सुलभ हो गया है.
कर्नाटक के अलावा तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में नए विकल्प जुड़े हैं, जिससे क्षेत्रीय संतुलन को भी बढ़ावा मिला है. युवाओं के लिए नए अवसर और मजबूत स्वास्थ्य ढांचा Union Minister प्रह्लाद जोशी ने इस उपलब्धि को रेखांकित करते हुए कहा कि India का मेडिकल एजुकेशन इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है. Government के इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के अधिक अवसर पैदा करना और सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचे का निर्माण करना है. इससे दूर-दराज के इलाकों तक बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी.
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जीसीबी/डीकेपी
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