
New Delhi, 1 अक्टूबर . कांग्रेस ने Thursday को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के ‘समस्याग्रस्त कामकाज’ पर शिकायत दर्ज कराई और Lok Sabha अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह अपने गठन के उद्देश्य को पूरा करे.
कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में कहा कि हमारा मानना है कि जेपीसी से पारित होने वाला कोई भी विधेयक त्रुटिरहित होना चाहिए और संसद को आश्वस्त होना चाहिए कि यह एक कठोर परामर्श प्रक्रिया से गुजरा है. ऐसा सुनिश्चित किए बिना, जेपीसी एक अर्थहीन अभ्यास और संसद के साथ एक धोखा है.
अपने पत्र में, लोक लेखा समिति के प्रमुख कांग्रेस नेता ने Lok Sabha अध्यक्ष से तीन अनुरोध किए और उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि जेपीसी सार्वजनिक सूचना के माध्यम से लिखित ज्ञापन आमंत्रित करे और सभी प्रभावित हितधारकों से मौखिक साक्ष्य सुने.
वेणुगोपाल ने बिरला से यह सुनिश्चित करने को कहा कि समिति को इस कार्य के लिए पर्याप्त समय दिया जाए, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर रिपोर्टिंग की समय सीमा का विस्तार भी शामिल हो, न कि उसे त्वरित समय सीमा से बांध दिया जाए.
उन्होंने अध्यक्ष से हस्तक्षेप करने का भी अनुरोध किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समिति के सदस्यों को धारा-दर-धारा विचार-विमर्श का पूरा अवसर मिले और समिति द्वारा निष्पक्ष और व्यापक जांच पूरी होने तक विधेयक को सदन में न उठाया जाए.
वेणुगोपाल ने कहा कि हमारे संसदीय संस्थानों में जनता का विश्वास इस आश्वासन पर टिका है कि उनके जीवन को प्रभावित करने वाले कानून उचित विचार-विमर्श के बाद ही बनाए जाते हैं. मुझे विश्वास है कि आप अपने पद की उच्च परंपराओं का पालन करते हुए यह सुनिश्चित करेंगे कि संयुक्त संसदीय समिति अपने गठन के उद्देश्य को पूरा करे.
एफसीआरए (संशोधन) विधेयक 2026 को 25 मार्च को Lok Sabha में पेश किया गया था और सांसदों द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद 12 अगस्त को 31 सदस्यीय जेपीसी को भेजा गया था.
Thursday को लिखे अपने पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि जेपीसी का जिक्र स्पष्ट अर्थ रखता है: व्यापक परामर्श और गहन जांच. इसका उद्देश्य गैर-सरकारी संगठनों, धर्मार्थ संस्थाओं, धार्मिक निकायों, स्वयंसेवी संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और राज्य Governmentों सहित सभी हितधारकों की राय लेना और सदन के समक्ष एक सुविचारित और त्रुटिरहित विधेयक प्रस्तुत करना है.
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि हालांकि, यह पता चला है कि हितधारकों के साथ कोई सार्थक परामर्श नहीं हो रहा है और आगामी शीतकालीन सत्र में विधेयक को जल्दबाजी में पारित करने का इरादा है. यदि ऐसा है, तो यह उस उद्देश्य को ही विफल कर देगा जिसके लिए सदन ने विधेयक को समिति को भेजा था और एक महत्वपूर्ण संसदीय प्रक्रिया को महज औपचारिकता बना देगा.
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एमएस/
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