एनसीपी के विलय की अटकलों पर महाराष्ट्र के सीएम बोले- हर कोई फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन एनडीए को भरोसे में लें

नागपुर, 7 नवंबर . एनसीपी गुटों के विलय को लेकर चल रही अटकलों के बीच Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने Saturday को कहा कि ये दो स्वतंत्र पार्टियां हैं और वह अपने फैसले खुद लेंगी.

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आखिरकार, ये दो अलग-अलग पार्टियां हैं और इन्हें अपने फैसले खुद लेने चाहिए. अगर वह ऐसा कोई फैसला लेती हैं तो वे हमें भरोसे में जरूर लेंगी.

उन्होंने कहा, “अंततः, ये दो स्वतंत्र पार्टियां हैं और वे अपने फैसले खुद लेंगी. उनकी पार्टी में शरद पवार साहब जैसे वरिष्ठ नेता हैं, साथ ही सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और पार्थ पवार भी हैं. इसलिए, मुझे नहीं लगता कि हमारी तरफ से उनकी ओर से कोई टिप्पणी करना या फैसला लेना उचित होगा. वे अपने फैसले खुद लेंगे.”

उन्होंने आगे कहा कि वे जो भी फैसला लेंगे, उसमें हमसे सलाह-मशविरा जरूर करेंगे, क्योंकि वे एनडीए गठबंधन में एक प्रमुख सहयोगी हैं.

उन्होंने कहा, “इसलिए, आज इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया देना हमारे लिए उचित नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने अभी तक हमसे इस बारे में कोई चर्चा नहीं की है. अगर उनकी तरफ से कोई बातचीत चल रही है तो वे हमें बताएंगे और हम उसी के अनुसार जवाब देंगे.”

उनके ये बयान तब आए हैं, जब एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल के Thursday को अस्पताल में एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार से मिलने के बाद, विलय को लेकर चल रही अटकलें और तेज हो गईं. इसके तुरंत बाद, विलय की योजनाओं को लेकर सुनील तटकरे के चौंकाने वाले खुलासे ने इन अटकलों को और हवा दे दी.

तटकरे ने Friday को कहा कि अगर पार्टी के पूर्व प्रमुख अजित पवार आज मौजूद होते तो दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियां (एनसीपी) आज एक हो गई होतीं.

तटकरे ने कहा, “जब अजित दादा जीवित थे, तब विलय को लेकर निश्चित रूप से बातचीत हुई थी. उन्होंने यह भी रूपरेखा तैयार की थी कि विलय कैसे होगा. अगर अजित दादा आज हमारे बीच होते तो 12 फरवरी को ही विलय हो गया होता. यह अजित दादा की मजबूत इच्छाशक्ति से ही संभव हो पाता. मैं अजित दादा का करीबी सहयोगी था, इसलिए मुझे इस मामले की जानकारी है.”

तटकरे ने बताया कि 28 जनवरी को एक हादसे में अजीत पवार का दुखद निधन हो गया, जिस वजह से आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. तटकरे ने आज खुलासा किया कि दोनों गुटों के विलय के लिए 12 फरवरी की तारीख तय की गई थी. उन्होंने दोहराया कि अगर अजीत पवार आज जीवित होते, तो दोनों गुट एक साथ देखने को मिलते.

इस बीच, एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर एनसीपी नेताओं के हालिया दावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. रोहित पवार ने रुख में आए इस अचानक बदलाव पर सवाल उठाते हुए प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं से पूछा कि वे अब विलय की बात क्यों कर रहे हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि अजीत पवार के निधन के तुरंत बाद उन्होंने विलय की किसी भी संभावना से इनकार क्यों किया था?

उन्होंने कहा कि वे अब ऐसा केवल Political दबाव और अपनी पार्टी के भीतर की आंतरिक मुश्किलों के कारण कर रहे हैं. रोहित पवार ने माना कि जब अजीत पवार जीवित थे, तब वास्तव में विलय को लेकर बातचीत हुई थी.

उन्होंने बताया कि अजीत पवार विलय के लिए मुख्य रूप से व्यक्तिगत और पारिवारिक भावनाओं के चलते जोर दे रहे थे, वे चाहते थे कि शरद पवार अपनी इस उम्र में और पूरा पवार परिवार एकजुट रहे.

उन्होंने अजीत पवार गुट के वरिष्ठ नेताओं द्वारा विलय की बातचीत को फिर से शुरू करने की अचानक दिखाई गई उत्सुकता पर हैरानी जताई. उन्होंने इशारा किया कि इसके पीछे Political अवसरवाद या पार्टी के भीतर के आंतरिक विवाद जैसे कि नेतृत्व को लेकर मतभेद हो सकते हैं, जिसकी वजह से उनका रुख अचानक बदल गया है.

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एएसएच/डीकेपी