
New Delhi, 8 अक्टूबर . राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली Police के जवानों पर तीन महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न से संबंधित मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है.
एनएचआरसी ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला है. आयोग ने दिल्ली Police आयुक्त को नोटिस जारी कर मामले में विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर पेश करने को कहा है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के समय तीन महिला पत्रकारों ने Policeकर्मियों पर कथित यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे.
एनएचआरसी ने कहा कि 5 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, New Delhi जिला Police को इन घटनाओं से संबंधित शिकायतें मिली थीं. इन शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए दिल्ली Police की क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है.
दिल्ली Police ने भी social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि 3 अक्टूबर को New Delhi इलाके में हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने Police अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. Police ने बताया कि New Delhi जिला Police को उनकी शिकायतें मिली हैं और निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच के लिए इन्हें क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित किया गया है.
जंतर-मंतर पर ये प्रदर्शन निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद आयोजित किए गए थे. प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.
इस बीच, आरोपों के सामने आने के बाद सहायक Police आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत ने स्वेच्छा से अनुरोध किया कि कथित उत्पीड़न की पूरी जांच होने और उसके संतोषजनक निष्कर्ष तक उन्हें अस्थायी वर्तमान ड्यूटी प्रभार पर बने रहने की अनुमति न दी जाए.
इसके बाद दिल्ली Government ने 5 अक्टूबर को जारी उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें वरिष्ठ Police अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था. संशोधित आदेश में विवेक भगत का नाम हटा दिया गया और बाकी 11 अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार में शामिल रखा गया.
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डीएससी
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