
चेन्नई, 25 सितंबर . चेन्नई के पूनमल्ली स्थित एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने Thursday को प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार सक्रिय कार्यकर्ताओं को कोयंबटूर स्थित हिंदू मुन्नानी के प्रवक्ता सी. शशिकुमार की हत्या के मामले में दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई.
एनआईए ने एक बयान में कहा कि दोषी व्यक्तियों (सद्दाम हुसैन, सुबैर, मुबारक और मोहम्मद रफीकुल हसन) को उम्रकैद के साथ 30,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है.
India Government द्वारा संगठन पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगाने के बाद से यह फैसला पीएफआई कार्यकर्ताओं से जुड़े मामलों में एनआईए की पहली सजा है.
22 सितंबर, 2016 को कोयंबटूर में शशिकुमार की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. बयान में कहा गया है कि यह लक्षित हत्या समाज के एक वर्ग में दहशत फैलाने और पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक अशांति भड़काने के स्पष्ट इरादे से की गई थी.
इस घटना के कारण कोयंबटूर शहर और कोयंबटूर ग्रामीण सहित 6 जिलों में व्यापक हिंसा भड़क उठी, जिसके चलते राज्य अधिकारियों को 300 से अधिक First Information Report दर्ज करनी पड़ीं.
यह मामला शुरू में कोयंबटूर के थुडियालुर Police स्टेशन में दर्ज किया गया था और बाद में तमिलनाडु के सीबी-सीआईडी द्वारा इसकी जांच की गई.
केंद्र Government के आदेश पर, यह मामला एनआईए को सौंपा गया और 22 जनवरी, 2018 को आरसी-03/2018/एनआईए/डीएलआई के रूप में पुनः पंजीकृत किया गया.
जांच में यह स्थापित हुआ कि आरोपी, पीएफआई के सक्रिय सदस्य होने के नाते, एक आपराधिक साजिश में शामिल थे और उन्होंने लक्षित हत्या को अंजाम दिया. गहन जांच के बाद, एनआईए ने 5 आरोपियों के खिलाफ एक आरोपपत्र और 2 पूरक आरोपपत्र दायर किए.
मुकदमा 2019 में शुरू हुआ, जिसके दौरान 75 अभियोजन गवाहों और 2 बचाव पक्ष के गवाहों से पूछताछ की गई. मुकदमे की सुनवाई अब आईपीसी की धारा 302, 120-बी और 153-ए और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 16, 18 और 20 के तहत अपराधों के लिए 4 आरोपियों को दोषी ठहराने के साथ समाप्त हुई है.
विशेष न्यायालय ने एक सह-आरोपी, जिसकी पहचान अबू उर्फ सैयद अबुथागिर के रूप में हुई है, को बरी कर दिया है. एनआईए वर्तमान में फैसले की समीक्षा कर रही है और अपील न्यायालय में बरी करने के फैसले को चुनौती देने के लिए सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है.
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एमएस/
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