
Mumbai , 4 अक्टूबर . शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और Maharashtra नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे के एक साथ आने को लेकर एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने कहा कि दोनों नेताओं का साथ आना अच्छी बात होगी, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि यह गठबंधन लंबे समय तक टिक पाएगा. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पहले भी साथ रहे हैं, लेकिन यह साथ ज्यादा समय तक नहीं चला था.
एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “अगर वे साथ आते हैं तो यह बहुत अच्छी बात होगी. वे पहले भी साथ थे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह गठबंधन बहुत लंबे समय तक चलेगा.”
उन्होंने Mumbai में हुए विपक्षी प्रदर्शन को इंडी गठबंधन का प्रदर्शन बताया. सिद्दीकी ने कहा कि इस प्रदर्शन में एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया. पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे समेत हजारों एनसीपी कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए.
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की रणनीति को लेकर भी नसीम सिद्दीकी ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह प्रयोग सफल होता नहीं दिख रहा है. कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में Samajwadi Party के प्रमुख अखिलेश यादव को नेता के तौर पर स्वीकार करना चाहिए और उनके साथ तालमेल बनाकर चुनाव लड़ना चाहिए.
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस को इससे कोई सफलता मिलेगी. यह कांग्रेस का सिर्फ एक प्रयोग है. कई बार प्रयोग असफल हो जाते हैं. कांग्रेस को अखिलेश यादव के संपर्क में रहना चाहिए और उनके साथ तालमेल बैठाकर चुनाव लड़ना चाहिए. वरना कांग्रेस की जो थोड़ी-बहुत मौजूदगी बची है, वह भी खत्म हो जाएगी और इससे सिर्फ अखिलेश कमजोर होंगे.”
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनआक्रोश का जिक्र करते हुए सिद्दीकी ने चुनाव आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि एनसीपी के सभी वरिष्ठ नेता इस मुद्दे को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल हुए थे. Government के साथ मिलकर चुनाव आयोग जिस तरह से काम कर रहा है, वह देश के लिए सही नहीं है.
उन्होंने कहा, “एक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल किया जा रहा है और इससे संविधान को नुकसान पहुंच रहा है. Government की उल्टी गिनती शुरू हो गई है.”
आरएसएस पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन हर मुद्दे को धर्म से जोड़ने की कोशिश करता है, जो देश के हित में नहीं है. उन्होंने कहा कि देश में कोई भी समस्या होने पर आरएसएस पीछे हटने लगती है, इसलिए संगठन को Political और सामाजिक मुद्दों से दूर रहना चाहिए.
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